प्रयागराज, 18 जून।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने सूबे की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश के कुल 465 वित्तविहीन (सेल्फ-फाइनेंस्ड) माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता समाप्त कर दी है। इस बडे़ फैसले की आधिकारिक जानकारी गुरुवार को यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने मीडिया को दी।
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि यह दंडात्मक कार्रवाई शासन द्वारा निर्धारित कड़े मानकों और मान्यता संबंधी अनिवार्य शर्तों का खुला उल्लंघन करने के कारण की गई है। इसके अलावा, जिला स्तर पर हुई समीक्षा में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि इन चिन्हित स्कूलों में बीते लगातार दो सालों से एक भी छात्र का नामांकन (एडमिशन) नहीं हुआ था, यानी ये स्कूल कागजों पर या पूरी तरह छात्रविहीन चल रहे थे।
ये सभी संस्थान उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (मान्यता प्रदान करने तथा विनियमावली) के नियमों के अंतर्गत संचालित हो रहे थे। लेकिन विभिन्न जांच टीमों द्वारा धरातल पर किए गए औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि इन विद्यालयों में किसी भी तरह की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावी रूप से नहीं चल रही थीं और न ही बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के मानकों का पालन किया जा रहा था।
बोर्ड प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए इस अंतिम कार्रवाई से पहले सभी संबंधित स्कूलों को 'कारण बताओ नोटिस' (शो-कॉज नोटिस) जारी कर अपना पक्ष और स्पष्टीकरण रखने का पूरा मौका दिया था। हालांकि, मैनेजमेंट द्वारा भेजे गए जवाबों और दलीलों का गहन परीक्षण करने पर जब कोई संतोषजनक वजह सामने नहीं आई, तब बोर्ड ने जनहित में इनकी मान्यता को पूरी तरह निरस्त करने का अंतिम फैसला ले लिया।
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बोर्ड प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था लागू रखने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि सूबे में मान्यता प्राप्त सभी छोटे-बड़े स्कूलों के लिए तय नियमों का अनुशासन मानना अनिवार्य है। जहां पढ़ाई-लिखाई ठप थी और दो साल से शून्य नामांकन था, वहां नियमानुसार ताला लटकाया गया है।
उन्होंने आगे जोड़ा कि इस कठोर निर्णय का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के गिरते स्तर को बचाना और पूरी स्कूली व्यवस्था को समाज के प्रति अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।














