नई दिल्ली, 18 जून।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए दुनिया में 118वां स्थान हासिल किया है। पिछले संस्करण में संस्थान 123वें स्थान पर था। इस उपलब्धि के साथ आईआईटी दिल्ली देश के अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थान के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है।
नई रैंकिंग के अनुसार, आईआईटी दिल्ली ने भारतीय संस्थानों की ओर से अब तक हासिल की गई सर्वोच्च वैश्विक रैंकिंग की बराबरी की है। संस्थान के विभिन्न प्रदर्शन मानकों में सुधार ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एम्प्लॉयर रेपुटेशन श्रेणी में आईआईटी दिल्ली ने 11 स्थानों की बढ़त दर्ज करते हुए वैश्विक स्तर पर 39वां स्थान प्राप्त किया। यह मानक इस बात को दर्शाता है कि दुनिया भर के नियोक्ता किसी संस्थान के विद्यार्थियों को रोजगार के लिए कितना सक्षम मानते हैं।
वहीं एम्प्लॉयमेंट आउटकम्स संकेतक में संस्थान ने 60 स्थानों का उल्लेखनीय सुधार किया है। यह श्रेणी विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रभाव व नेतृत्व का आकलन करती है। इसके अलावा साइटेशन्स प्रति फैकल्टी मानक में भी 26 स्थानों की प्रगति दर्ज की गई, जो शोध की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को प्रतिबिंबित करता है।
इस उपलब्धि पर आईआईटी दिल्ली के डीन (योजना) एवं रैंकिंग सेल प्रमुख प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण और किफायती तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ वैश्विक शोध समुदाय के लिए पसंदीदा केंद्र बनने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उनका कहना है कि नया पाठ्यक्रम, आधुनिक सुविधाएं और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग आने वाले समय में संस्थान को और सशक्त बनाएगा।
उन्होंने कहा कि रैंकिंग किसी संस्थान का अंतिम लक्ष्य नहीं होती, बल्कि उसके निरंतर प्रयासों और उपलब्धियों का परिणाम होती है।
पिछले चार वर्षों के दौरान आईआईटी दिल्ली ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में 79 स्थानों का सुधार किया है। वर्ष 2024 में संस्थान 197वें स्थान पर था, जो अब बढ़कर 118वें स्थान तक पहुंच गया है।
मार्च 2026 में जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट में भी आईआईटी दिल्ली के कई इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विषय दुनिया के शीर्ष 50 विषयों में शामिल हुए थे। इनमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग प्रमुख रहे। इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी श्रेणी में संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 36वां स्थान हासिल कर देश में अपनी अग्रणी पहचान बरकरार रखी थी।














