वाराणसी, 19 मार्च।
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में सनातन नववर्ष को लेकर गुरुवार को लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
नववर्ष के पहले दिन सूर्योदय की लालिमा के साथ गंगाघाट, पौराणिक तालाब और कुंड वैदिक मंत्रों तथा ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठे। डमरू और शंख की मंगलध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया, गंगा में दीपदान किया और सूर्य नमस्कार कर हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का अनूठे अंदाज में स्वागत किया। इसमें बटुक, संत समाज और काशीवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह दृश्य काशी के प्रमुख घाटों अस्सी, पंचगंगा, दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद और शंकराचार्य घाटों पर देखने को मिला। विभिन्न संगठनों की ओर से तड़के वेद पाठ, सामूहिक सूर्य वंदन और अर्घ्यदान का आयोजन किया गया। नव संवत्सर के स्वागत के लिए लोग भोर में ही गंगा तट पर पहुंच गए थे।
नव संवत्सर के अवसर पर अस्सी स्थित पुष्कर तालाब में जागृति फाउंडेशन, ब्रह्मा वेद विद्यालय और स्वामीनारायणानंद तीर्थ वेद विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं आरती की। इसके बाद वेदपाठी बटुकों ने पुष्कर तालाब में भगवान सूर्य को प्रथम जल अर्पित किया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लोकभूषण सम्मान से सम्मानित साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश मिश्रा, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, अरुण कुमार द्विवेदी और आचार्य पंडित वरुणेश चंद्र दीक्षित उपस्थित रहे। इस दौरान डॉ. जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म का नव संवत्सर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने का संदेश देता है। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने किया।
इसी क्रम में शंकराचार्य घाट पर श्री विद्यामठ के बटुकों ने योग के विभिन्न आसनों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रों के बीच सूर्य नमस्कार, अर्घ्य और दीपदान कर नवसंवत्सर का स्वागत किया गया।
इस अवसर पर ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘सनातन पंचांग’ का विमोचन कर देशवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं।












