नई दिल्ली, 26 मार्च।
पश्चिम एशिया में जारी वैश्विक तनाव के बीच, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का कार्यक्रम जारी कर दिया है। आरबीआई की पहली तीन दिवसीय द्विमासिक एमपीसी समीक्षा बैठक 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित होगी।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति आगामी वित्त वर्ष में कुल छह बैठकें करेगी। केंद्रीय बैंक ने यह कैलेंडर आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45ZI के तहत जारी किया है, जिसमें नीतिगत बैठकों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य है। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करना और रेपो रेट व तरलता उपायों से जुड़े अहम निर्णय लेना है।
आरबीआई की दूसरी बैठक 3 से 5 जून तक होगी, इसके बाद तीसरी बैठक 3 से 5 अगस्त, चौथी 5 से 7 अक्टूबर, पांचवीं 2 से 4 दिसंबर और छठी बैठक 3 से 5 फरवरी, 2027 तक आयोजित की जाएगी। आम तौर पर, प्रत्येक एमपीसी बैठक के अंतिम दिन समिति प्रस्ताव पर मतदान करती है और उसके बाद रिजर्व बैंक गवर्नर निर्णय की घोषणा करते हैं।
मौद्रिक नीति समिति में छह सदस्य होते हैं, जिसमें तीन आरबीआई अधिकारी (गवर्नर सहित) और तीन बाहरी सदस्य शामिल हैं, जिन्हें केंद्र सरकार नियुक्त करती है। एमपीसी का मुख्य कार्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत रेपो रेट तय करना है।
शेयर बाजार भी एमपीसी की बैठकों पर नजर रखता है, क्योंकि इसमें नीतिगत दरों का निर्धारण किया जाता है और केंद्रीय बैंक का मुद्रास्फीति तथा विकास पर रुख स्पष्ट होता है। पिछली बैठक 4 से 6 फरवरी को हुई थी, जिसमें सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया था।












