नई दिल्ली, 26 मार्च 2026।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व में इलेक्ट्रो-टेक्नोलॉजी का एक प्रमुख निर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, ताकि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की बजाय सस्ते सौर ऊर्जा और बैटरी आधारित औद्योगिकीकरण की ओर अग्रसर है, जिससे पश्चिम और चीन द्वारा अपनाई गई कोयला आधारित ऊर्जा पथ से भारत अलग राह चुन रहा है।
2025 में भारत की कुल बिजली का लगभग 9 प्रतिशत सौर ऊर्जा से उत्पन्न हो रहा है और प्रति व्यक्ति कोयले की खपत चीन की तुलना में लगभग एक-चौथाई है। इसके अलावा, भारत पहले ही अपने कोयला उत्पादन की चरम सीमा के निकट पहुँच चुका है।
सड़क पर तेल की खपत प्रति व्यक्ति 96 लीटर है, जो चीन की समान स्थिति में खपत का आधा है और भविष्य में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और तीन-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में भारत दुनिया में अग्रणी है, जहां बाजार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक मॉडल का है।
इसके अलावा, भारत में अंतिम ऊर्जा खपत में बिजली का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है, जो समान आय स्तर पर चीन के बराबर है और आज विकसित देशों के स्तर के करीब है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जब चीन ने प्रति व्यक्ति 1,500 kWh बिजली खपत को पार किया था, तब कोयला सौर ऊर्जा की तुलना में दस गुना सस्ता था, जबकि आज भारत उसी सीमा पर पहुँच चुका है और सौर ऊर्जा व स्टोरेज की लागत नई कोयले की तुलना में आधी है।
नीति-प्रोत्साहन के कारण भारत में निर्माण क्षेत्र में भी तेजी आई है। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पिछले दशक में लगभग छह गुना बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है और यह इलेक्ट्रो-टेक क्षेत्र में प्रवेश का द्वार बन गया है।
स्मार्टफोन निर्माण के लिए विकसित क्षमताएं अब सौर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी विस्तारित हो रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सौर मॉड्यूल उत्पादन बारह गुना बढ़कर 120 GW हो गया है, जो स्वावलंबन के लिए पर्याप्त है। सेल निर्माण लगभग नहीं होने के बावजूद अब 18 GW तक पहुँच चुका है, जबकि बैटरी और ईवी निर्माण भी तेजी से बढ़ रहा है।





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