नई दिल्ली, 06 अप्रैल।
भारत ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक पवन ऊर्जा क्षमता विस्तार दर्ज किया है। इस दौरान 6.05 गीगावॉट (GW) पवन ऊर्जा की नई क्षमता जोड़ी गई, जो देश की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह वृद्धि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक है, जो ऑनशोर पवन ऊर्जा तैनाती में तेजी को दर्शाती है। इस विस्तार के साथ भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW के पार पहुंच गई है, जिससे देश दुनिया के प्रमुख पवन ऊर्जा बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करता है।
इस विकास को नीति समर्थन, बेहतर ट्रांसमिशन अवसंरचना और परियोजनाओं की मजबूत पाइपलाइन से बल मिला है। गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों ने इस क्षमता विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं और ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस पहलों का विस्तार भी इस वृद्धि में योगदान दे रहा है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस रिकॉर्ड वृद्धि का श्रेय सरकारी हस्तक्षेपों को दिया है, जिनमें पवन टरबाइन घटकों पर रियायती कस्टम ड्यूटी, 2028 तक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्क में छूट, प्रतिस्पर्धात्मक बोलियां और पवन ऊर्जा के लिए समर्पित नवीकरणीय खपत अनिवार्यता ढांचे शामिल हैं।
राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) से तकनीकी समर्थन ने भी इस क्षेत्र के विकास और कार्यान्वयन क्षमता को मजबूत किया है।
इस मील के पत्थर से भारत की नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और यह 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
भारत का पवन ऊर्जा कार्यक्रम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था और अब यह एक परिपक्व और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बन गया है, जो मजबूत नीति ढांचे और बढ़ते निवेशक विश्वास से समर्थित है।





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