नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गुजरात विधानसभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कड़ा विरोध जताते हुए इसे गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। बोर्ड प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह कदम गैर संवैधानिक है और संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
सम्मेलन में जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने भी हिस्सा लिया। कासिम रसूल इलियास ने कहा कि राज्य सरकारों को इस तरह का कानून बनाने का अधिकार नहीं है, लेकिन उनके एजेंडे के अनुसार इसे बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कानून से किसी तरह का लाभ नहीं होगा, बल्कि भविष्य में नए विवाद और उलझनें बढ़ेंगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में फैमिली कोर्ट सभी प्रकार के पारिवारिक विवादों का समाधान कर रहे हैं और विभिन्न धर्मों के लोग अपने पर्सनल लॉ के अनुसार अपने मामलों को सुलझा सकते हैं। ऐसे में यूसीसी की कोई आवश्यकता नहीं है। कासिम रसूल इलियास ने कहा कि इस यूसीसी में हिंदू धर्म से जुड़े रीति-रिवाज थोपने का प्रयास किया गया है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र से गुजरात और उत्तराखंड यूसीसी पर हस्तक्षेप की मांग की और बताया कि उत्तराखंड यूसीसी को पहले ही उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, इसी तर्ज पर गुजरात यूसीसी को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
मलिक मोतसिम खान ने कहा कि समान नागरिक संहिता को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा और वे गुजरात में यूसीसी के विरोध में खड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यूसीसी सभी लोगों के लिए है, तो आदिवासी और जनजातीय समुदायों को इससे छूट क्यों दी गई, जिससे यूसीसी लागू करने का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो जाता है। उन्होंने मुसलमानों और अन्य धर्मों के लोगों से यूसीसी के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।











