तेहरान, 6 जून।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप स्थित रडार केंद्रों पर कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार होर्मुज क्षेत्र में ईरान के चार ड्रोन मार गिराए गए, जिसके बाद संभावित खतरों को रोकने के उद्देश्य से रडार ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी जवाबी कदम उठाने का दावा किया है। ईरानी पक्ष के अनुसार होर्मुज के निकट मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल हमलों का निशाना बनाया गया। घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से छह मिसाइलों को रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रही।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान की कुल क्षमता का केवल लगभग 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावी रूप से बचा है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्टों में अलग तस्वीर सामने आई है। इन रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान ने अपने अधिकांश मिसाइल ठिकानों को दोबारा सक्रिय कर लिया है और उसके पास अब भी करीब 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देशों की ओर से लगातार किए जा रहे दावों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच हालात संवेदनशील बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।








