रांची, 06 जून ।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा ने वरिष्ठ नेता बैजनाथ राम को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने उनके नाम की औपचारिक घोषणा की, जिसके साथ ही महागठबंधन की रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट होती नजर आई।
पार्टी के इस निर्णय के बाद गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और संभावित मतभेदों को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है और एकजुटता का संदेश सामने आया है।
कांग्रेस और झामुमो द्वारा अलग-अलग उम्मीदवार उतारे जाने के बाद यह संकेत भी मिला है कि महागठबंधन राज्यसभा चुनाव को साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ा रहा है।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जारी है कि झामुमो भविष्य में एक और उम्मीदवार उतारने पर विचार कर सकता है, जिससे समीकरण बदल सकते हैं।
उम्मीदवार चयन के दौरान सामाजिक संतुलन पर भी ध्यान दिया गया है, जहां कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं झामुमो ने पिछड़ा वर्ग से आने वाले बैजनाथ राम पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने और व्यापक राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इसी बीच राज्यसभा की दो सीटों के लिए चार नेताओं द्वारा नामांकन पत्र खरीदने से चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नामांकन पत्र लेने वालों में कांग्रेस के प्रणव झा, झामुमो के बैजनाथ राम के साथ-साथ गौरव वल्लभ और परिमल नाथवानी के नाम शामिल हैं, जिससे संभावित मुकाबले को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव झारखंड की राजनीति में नए समीकरण और रणनीतिक बदलाव ला सकता है, जहां दलों की आगे की चाल निर्णायक भूमिका निभाएगी।








