नई दिल्ली, 06 जून ।
लद्दाख से दिल्ली पहुंचे सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन में भाग लेते हुए शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए और व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव आवश्यक हैं ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
अपने संबोधन में उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए मांग की कि शिक्षा नीति बनाने वाले सभी अधिकारी, चुने हुए जनप्रतिनिधि तथा सरकारी वेतन प्राप्त करने वाले सभी लोगों के बच्चों का अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में अध्ययन कराया जाए।
वांगचुक ने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे सरकार के प्रति एक आग्रह बताया और कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे सीधे युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालिया परीक्षा विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब युवाओं का भरोसा रखने वाली परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो उनका विश्वास टूट जाता है, इसलिए परीक्षाओं में केवल ईमानदारी की मांग की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का वास्तविक सुधार तब संभव है जब ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए, क्योंकि वही 'विकसित भारत' की नींव मजबूत कर सकते हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए वांगचुक ने कहा कि नेताओं से इस्तीफा मांगने की स्थिति नहीं आनी चाहिए, बल्कि उन्हें स्वयं अपनी जिम्मेदारी और नैतिकता को समझते हुए निर्णय लेना चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और संबंधित मामलों में कार्रवाई हुई, तो वे 42 दिनों के अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे।
कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भी जोरदार आवाज उठाई।









