दक्षिण एशिया
17 Jun, 2026

बांग्लादेश में रैपिड एक्शन बटालियन होगी खत्म, बनेगा नया सुरक्षा बल

बांग्लादेश सरकार अपने विशिष्ट अर्धसैनिक बल रैपिड एक्शन बटालियन को समाप्त कर उसकी जगह मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील और अधिक जवाबदेह नया सुरक्षा बल गठित करने की तैयारी कर रही है।

ढाका, 17 जून।

हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में सुरक्षा तंत्र को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया जा रहा है, जिसके तहत वहां की तारिक रहमान सरकार अपनी चर्चित रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) को पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी में है। गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए एक विशेष ब्लूप्रिंट के मुताबिक, इस पुराने बल की जगह अब एक बिल्कुल नया सुरक्षा बल मैदान में उतारा जाएगा।

साल 2004 में वजूद में आई यह बटालियन देश की बेहद खास अर्धसैनिक बल मानी जाती रही है, जिसके कंधों पर देश की आंतरिक सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त रखने, आतंकवाद तथा उग्रवाद का सफाया करने और बड़े संगठित अपराधों पर लगाम कसने की मुख्य जिम्मेदारी रही है।

प्रक्रिया से जुड़े अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के संकेत बताते हैं कि तैयार किए जा रहे इस नए ढांचे के अंतर्गत आने वाला नया सुरक्षा बल वर्तमान आरएबी के सभी संसाधनों, संपत्तियों, तैनात कर्मचारियों और पहले से जारी अभियानों की कमान अपने हाथों में ले लेगा। इस नए बल के लिए मुख्य रूप से दो नामों 'स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन' (एसआरबी) या फिर 'पीपल्स प्रोटेक्शन फोर्सेज' (पीपीएफ) पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार जल्द ही एक नया विशेष कानून लाकर इस पूरे वर्तमान ढांचे को नए बल में समाहित कर देगी।

गृह मंत्रालय के इस नए मसौदे में यह भी साफ किया गया है कि नए बल का हिस्सा बनने वाले पुराने कर्मचारियों और जांबाज अधिकारियों की मौजूदा सेवा शर्तों में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस नए कानून को लाने का असली मकसद देश की पुलिस व्यवस्था के अंतर्गत एक बेहद आधुनिक और मददगार सुरक्षा बल तैयार करना है, जो आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत कर सके। इस नए बल के पास किसी भी संदिग्ध ठिकाने की तलाशी लेने, वहां दाखिल होने और आरोपियों को हिरासत में लेने की पूरी ताकत होगी, मगर इसकी लिखित जानकारी पास के पुलिस थाने को देनी होगी।

दरअसल, इस पुराने बल पर काफी लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघन के बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगते रहे हैं। साल 2021 में अमेरिका ने भी अधिकारों के हनन के मामले में इस बल से जुड़े सात बड़े मौजूदा और पूर्व आला अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके अलावा, बीते जुलाई महीने में देश के भीतर हुए भीषण विद्रोह के बाद, जबरन गायब किए गए नागरिकों के मामलों की जांच के लिए बने विशेष आयोग ने भी इस बल को भंग करने की पुरजोर वकालत की थी। सरकार के अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे बदलाव का मकसद केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि जनता के प्रति एक जिम्मेदार और संवेदनशील विंग का गठन करना है।

इस बड़े फैसले पर कानून के जानकारों का कहना है कि सिर्फ बल का नाम बदल देने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके भीतर जवाबदेही का भाव पैदा करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने माना कि आरएबी के पास काम का एक लंबा तजुर्बा है और उनकी ऑपरेशनल क्षमता भी कमाल की है, इसलिए नए सुधारों का पूरा फोकस गलतियां करने वालों को सख्त सजा देने और उनकी कार्यप्रणाली पर पैनी नजर रखने पर होना चाहिए।

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