स्विट्जरलैंड, 21 जून।
पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध को थामने के लिए अब स्विट्जरलैंड में बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सैन्य प्रमुख असीम मुनीर वहां पहुंच चुके हैं। इन उच्चस्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है।
ईरान ने लेबनान पर इजराइली हमलों का हवाला देते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा किया है। साथ ही तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध नहीं रुकता है, तो इन वार्ताओं का कोई ठोस परिणाम निकलना मुश्किल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो वे उस जलमार्ग पर अमेरिकी टोल टैक्स लगा देंगे। ट्रंप के अनुसार, यह शुल्क मध्य पूर्व के देशों के लिए 'गार्जियन एंजेल' के रूप में दी जाने वाली सेवाओं के बदले लिया जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि उनका देश इस बातचीत में अपने पूर्व के समझौतों के सम्मान और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर जोर देगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें विश्वास है कि संघर्ष विराम बना रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें जलमार्ग के बंद होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को लागू करने के लिए पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शरीफ और सैन्य प्रमुख असीम मुनीर इस अहम वार्ता में भाग लेंगे, जिसका लक्ष्य क्षेत्र में शांति बहाल करना है।










