नई दिल्ली, 21 जून।
पंचायती राज मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नई दिल्ली में निर्भय चेतना प्रशिक्षण मॉड्यूल का शुभारंभ किया है। यह पहल 'निर्भया फंड' परियोजना का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है।
तीन दिवसीय 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' कार्यक्रम के दौरान मंत्रालय ने इस नई पहल की शुरुआत की। पायलट बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड जैसे छह राज्यों से लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए। यह मॉडल अब धीरे-धीरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तारित किया जाएगा।
पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' का सपना तब तक अधूरा है, जब तक महिलाओं को समान सुरक्षा और भागीदारी न मिले। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंचायतें सामाजिक और लोकतांत्रिक बदलाव की मुख्य संस्थाएं हैं, जो ग्रामीण स्तर पर लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।
'निर्भय चेतना' का मुख्य लक्ष्य लैंगिक संवेदनशील नेतृत्व तैयार करना है। यह अभियान 11 मार्च 2026 को शुरू की गई 'निर्भय रहो' पहल का ही एक प्रमुख हिस्सा है।
अब तक इस परियोजना के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स का एक कैडर तैयार किया जा रहा है। इसका अंतिम लक्ष्य देशभर के 17 लाख से अधिक पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करना है।









