तेहरान, 28 जून।
होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक व्यापारिक जहाज पर ड्रोन से किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की चिंगारी भड़क उठी है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने सिरिक शहर, बंदर-ए-लेंघे और केशम द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया।
इस ताजा भीषण बमबारी के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसके चलते बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देश में हवाई हमले के आपातकालीन सायरन गूंजने लगे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुवैती सेना ने बयान जारी कर कहा है कि वे दुश्मन की ओर से किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों का पूरी ताकत से जवाब दे रहे हैं।
इस बीच, लेबनान में शांति बहाली की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। लेबनान सरकार के साथ संघर्ष विराम के एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर होने के ठीक अगले ही दिन इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के इलाकों पर भारी गोलाबारी कर दी। इस अप्रत्याशित हमले में कम से कम एक नागरिक की मौत हो गई है।
इजराइल द्वारा किए गए इस उल्लंघन के बाद लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह ने इजराइल के साथ हुए इस शांति समझौते को पूरी तरह से नकारते हुए इसे संप्रभुता का आत्मसमर्पण करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के भीतर करीब 10 प्रमुख सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी मध्य कमान (सेंटकॉम) के मुताबिक, उनके लड़ाकू विमानों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर और उसके आसपास के रणनीतिक स्थानों पर हमले किए हैं, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया गया है।
इधर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका ने देश के पांच तटीय क्षेत्रों में बमबारी की है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि वे दुश्मन की इस आक्रामकता का करारा जवाब देंगे। उनका कहना है कि अंतरिम समझौते के तहत जलडमरूमध्य में यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी तेहरान की है और अब नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर पहले से ज्यादा सख्ती बरती जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि ईरान द्वारा युद्धविराम का उल्लंघन किए जाने के कारण ये हमले किए गए, जिनमें ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स तथा रडार प्रणालियों को निशाना बनाया गया है। सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई पनामा के झंडे वाले उस तेल टैंकर पर रात में हुए ईरानी ड्रोन हमले का बदला है, जिसमें 20 लाख बैरल से अधिक तेल लदा था।
ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका को मजबूर होकर अपनी पूरी सैन्य शक्ति का उपयोग करना पड़ा, तो ईरान का अस्तित्व ही मिट जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन की राजधानी मनामा में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिसकी ओमान ने कड़ी निंदा की है।
विदित हो कि फरवरी के अंत में शुरू हुई यह जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने 28 फरवरी को ईरान के विरुद्ध बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया था, जिसके बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सरकारी और सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि इस सप्ताहांत स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में शांति वार्ता के प्रयास शुरू हुए थे, लेकिन दोबारा जंग छिड़ने से ये प्रयास विफल हो गए हैं।









