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26 Sep, 2026

ओडिशा में गहरे दबाव के चलते भारी बारिश का कहर: नदियां उफान पर, भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

ओडिशा में गहरे दबाव के क्षेत्र के कारण हुई मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं, कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और हजारों प्रभावित लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

भुवनेश्वर (ओडिशा), 26 सितंबर।

ओडिशा राज्य में गहरे दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने के परिणामस्वरूप शुक्रवार को मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते कम से कम 63 अलग-अलग स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इस भीषण बारिश के कारण प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, कई जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं और भारी जलभराव के हालात बन गए हैं, जिससे मजबूरन प्रशासन को स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के मद्देनजर तटीय राज्य के दक्षिणी व पश्चिमी हिस्सों के निचले इलाकों तथा भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर करीब 14,500 नागरिकों को 2,061 राहत शिविरों में शरण दी गई है।

बता दें कि आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद यह गहरा दबाव का क्षेत्र ओडिशा में दाखिल हुआ, जिसके प्रभाव से शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे तक के पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के बहुतायत इलाकों में अत्यंत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस आपदा से सबसे अधिक मार झेलने वाला नबरंगपुर जिले का तेंतुलीखुंटी रहा, जहां रिकॉर्ड 395 मिमी बारिश हुई, जबकि इसके बाद नंदाहांडी में 344 मिमी और कोरापुट के बोरीगुमा में 307.8 मिमी वर्षा आंकी गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, दक्षिणी ओडिशा के छह जिले इस मार से सबसे ज्यादा बेहाल हैं, इसके अलावा राजधानी भुवनेश्वर समेत पश्चिमी व तटीय इलाकों में भी सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

खतरनाक रूप लेती स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बालासोर में जलाका और बुढ़ाबलंगा तथा जाजपुर में बैतरणी व कानी नदियां पहले ही चेतावनी के निशान को पार कर चुकी हैं, जिससे एक बार फिर से बाढ़ का गंभीर संकट मंडराने लगा है। गौरतलब है कि इस पूरे मानसून सीजन के दौरान राज्य पहले ही दो बार बाढ़ जैसी विभीषिका का सामना कर चुका है। कंधमाल के कलिंग घाट पर हुए भूस्खलन के कारण लगभग 200 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार जमींदोज हो गई, वहीं खल्लिकोट के बड़ा घाटी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर भारी चट्टानें खिसककर आ जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

इसके अलावा गजपति के मोहना और मलकानगिरी के कई हिस्सों में लैंडस्लाइड के कारण मार्गों का संपर्क टूट गया है। रायगड़ा में कई स्थानों पर तूफानी हवाओं से पेड़ उखड़कर सड़कों पर आ गिरे, जबकि रेलवे ट्रैक पर मिट्टी धंसने से रायगड़ा मंडल में रेल परिचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। राजस्व विभाग के नुमाइंदों ने पुष्टि की है कि कई प्रभावित क्षेत्रों का सड़क संपर्क बाहरी दुनिया से कट चुका है और ब्रह्मपुर शहर के निचले इलाके अभी भी पानी में डूबे हुए हैं, जिससे राहत व बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है।

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