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हिंदी सिनेमा
02 Oct, 2026

प्रेम कीटाणु समीक्षा: कमजोर कहानी और फीकी कॉमेडी ने रोमांटिक फिल्म का मजा किया किरकिरा

‘प्रेम कीटाणु’ प्यार, दोस्ती और परिवार के रिश्तों को आपस में जोड़ती है, लेकिन कमज़ोर पटकथा, सतही किरदार और फीकी कॉमेडी इस फ़िल्म को प्रभावी मनोरंजन नहीं बनने देते।

मुंबई, 02 अक्टूबर।

प्यार, दोस्ती, परिवार और हास्य को साथ लेकर चलने वाली फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी बनने की कोशिश करती है, लेकिन कमजोर लेखन और बिखरी कहानी इसकी सबसे बड़ी कमियां बन जाती हैं। कहानी विशाल और सुहानी के रिश्ते से शुरू होती है। विशाल इस रिश्ते को लेकर गंभीर है, लेकिन सुहानी की अपनी अपेक्षाएं और सोच हैं। इसी बीच रंजीत की एंट्री से कहानी में प्रेम त्रिकोण के साथ दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों को भी जोड़ा जाता है। हालांकि, कई घटनाएं स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़ने के बजाय कहानी को आगे ले जाने के लिए जोड़ी गई महसूस होती हैं। किरदारों के फैसलों और भावनाओं को पर्याप्त आधार नहीं मिलने से कहानी दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव नहीं बना पाती। निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म का माहौल हल्का रखने का प्रयास किया है, लेकिन पटकथा रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक ड्रामा के बीच संतुलन कायम नहीं कर पाती। कई दृश्य सतही लगते हैं और हास्य भी लगातार असर नहीं छोड़ता। रोमांटिक हिस्सों में भी अपेक्षित भावनात्मक गहराई नजर नहीं आती। वीर पहाड़िया ने विशाल की मासूमियत और उलझन को सहजता से निभाने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर किरदार-लेखन उनके अभिनय को ज्यादा प्रभावी नहीं बनने देता। आफिया सैयद पहली फिल्म में आत्मविश्वास दिखाती हैं, हालांकि उनके किरदार को भी पर्याप्त मजबूती नहीं मिली है। वीर और आफिया की केमिस्ट्री कुछ जगह ठीक लगती है, लेकिन फिल्म को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। अपारशक्ति खुराना को रंजीत के रूप में अपेक्षित प्रभावी सामग्री नहीं मिलती, वहीं राकेश बेदी और अन्य कलाकार भी अपनी ओर से फिल्म को संभालने का प्रयास करते हैं।

‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ जैसे गीत फिल्म के रोमांटिक माहौल को बनाए रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन संगीत कहानी को मजबूती देने में बड़ी भूमिका नहीं निभा पाता। दृश्य प्रस्तुति और संपादन सामान्य हैं तथा ऐसा कोई खास तकनीकी पक्ष नहीं है जो फिल्म को यादगार बना सके। 2 घंटे 18 मिनट की अवधि के बावजूद फिल्म कई जगह खिंची हुई महसूस होती है और अनावश्यक दृश्यों को कम करने से इसकी गति बेहतर हो सकती थी। कुल मिलाकर, ‘प्रेम कीटाणु’ प्यार, दोस्ती और परिवार जैसे कई विषयों को एक साथ लेकर चलती है, लेकिन किसी भी पहलू को पर्याप्त गहराई नहीं मिल पाती। वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और अपारशक्ति खुराना की कोशिशें अपनी जगह हैं, मगर कलाकारों का प्रदर्शन कमजोर पटकथा की भरपाई नहीं कर पाता। फिल्म कुछ हल्के-फुल्के पलों में मनोरंजन देती है, लेकिन कमजोर कहानी, सतही किरदार और फीकी कॉमेडी के कारण यह ऐसी प्रभावी प्रेम कहानी नहीं बन पाती, जो दर्शकों पर लंबे समय तक असर छोड़ सके।

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