जोधपुर, 9 अक्टूबर।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने दो बच्चों की 30 वर्षीय मां को अपने लिव-इन साथी के साथ रहने की स्वतंत्रता दे दी है। न्यायमूर्ति मुन्नुरी लक्ष्मण और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल सोनी ने अदालत को बताया कि वह महिला के साथ लिव-इन संबंध में रह रहा है। दोनों को 19 जून 2026 को उच्च न्यायालय से सुरक्षा का आदेश भी मिला था। इसके बावजूद महिला के कानूनी पति ने उसे कथित तौर पर अवैध रूप से अपने पास रोक रखा था।
इस मामले में अदालत ने महिला को पेश करने का निर्देश दिया। महिला के न्यायालय में उपस्थित होने पर पीठ ने उसके दो नाबालिग बच्चों का ध्यान रखते हुए उसे परामर्श के लिए नारी निकेतन भेजने का सुझाव दिया। हालांकि, महिला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
महिला ने अदालत में स्पष्ट कहा कि वह अपना निर्णय नहीं बदलेगी और अपने लिव-इन साथी के साथ ही रहना चाहती है। उसने यह भी कहा कि वह अपने पति से तलाक लेने के लिए तैयार है।
महिला की बात सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि वह बालिग है और अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है। इसके साथ ही अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए महिला को मुक्त करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने रजिस्ट्री को याचिकाकर्ता की ओर से जमा कराया गया मांगपत्र भी वापस लौटाने के निर्देश दिए।














