भारत और ब्रिटेन ने अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु ऊर्जा, वैज्ञानिक अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिटेन के व्यापार, नवाचार, विज्ञान एवं व्यापार राज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, लघु मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान सहित कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों से निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खुले हैं। उन्होंने दोनों देशों के वैज्ञानिक संस्थानों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
भारत में लगभग 800 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय और ब्रिटिश स्टार्टअप्स तथा छोटी कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। इससे नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर चर्चा
बैठक में नागरिक परमाणु ऊर्जा, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े अवसरों की जानकारी दी।
उन्होंने परमाणु ऊर्जा के विकास से संबंधित शांति अधिनियम, 2025 का भी उल्लेख किया। बढ़ती ऊर्जा जरूरतों, औद्योगिक विकास और डेटा केंद्रों की बिजली मांग को देखते हुए उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के महत्व पर विचार किया गया।
चिकित्सा अनुसंधान और कैंसर उपचार में सहयोग
डॉ. सिंह ने परमाणु विज्ञान के चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग पर प्रकाश डालते हुए रेडियोआइसोटोप और कैंसर अनुसंधान में भारत की गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने जीवन विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान में ब्रिटेन की विशेषज्ञता के साथ साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं बताईं। उष्णकटिबंधीय बीमारियों पर दोनों देशों के ऐतिहासिक वैज्ञानिक सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम तकनीक पर जोर
वार्ता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर-भौतिक प्रणालियों और साइबर सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप छोटे कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल विकसित करने में भारत की रुचि बताई।
दोनों पक्षों ने नई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग, उनसे जुड़े जोखिमों के प्रबंधन और महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर सहमति जताई। उन्नत सेंसर, गुरुत्वमापी और अंतरिक्ष आधारित भू-स्थानिक अनुप्रयोगों में संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
ब्रिटेन ने साझेदारी बढ़ाने में दिखाई रुचि
ब्रिटिश मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद, अनुसंधान और व्यावसायिक सहयोग को आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने ब्रिटेन की अंतरिक्ष रणनीति का उल्लेख करते हुए नागरिक परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग बढ़ाने की रुचि जताई।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ब्रिटेन की आगामी जी-20 अध्यक्षता की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए तकनीकी नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने में भारत के साथ साझेदारी की संभावनाओं का स्वागत किया।
बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वाघमारे और अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े सलाहकार एवं प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमसुंदरम शामिल रहे। ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल में भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन और विभाग की अंतरिम स्थायी सचिव अमांडा ब्रूक्स भी मौजूद थीं।














