मास्को में होने वाली रामलीला के निर्माता और निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार, रामलीला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है। रूसी कलाकारों की भागीदारी भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। यह आयोजन दोनों देशों की परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों के आदान-प्रदान का अवसर भी है।
2018 में अयोध्या से शुरू हुआ सफर
रूसी कलाकारों और अयोध्या के बीच रामलीला के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव नवंबर 2018 में शुरू हुआ था। उस समय अयोध्या में रूस की 'दिशा रामलीला' का पहला मंचन हुआ। विदेशी कलाकारों द्वारा रामायण की कथा प्रस्तुत किए जाने से इस सांस्कृतिक पहल को विशेष पहचान मिली।
इसके बाद जनवरी 2019 में प्रयागराज कुंभ मेले में भी 'दिशा रामलीला' का मंचन किया गया। बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में रूसी कलाकारों की भागीदारी ने भारत की रामायण परंपरा को अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर दिया।
दीपोत्सव से भी जुड़ा रूसी कलाकारों का सफर
अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव समारोहों में भी 'दिशा रामलीला' की प्रस्तुतियां शामिल रही हैं। भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की स्मृति में मनाए जाने वाले इस उत्सव में रूसी कलाकारों की भागीदारी ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाया है।
डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार, मास्को में होने वाला मंचन केवल धार्मिक कथा की प्रस्तुति नहीं है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का अवसर भी है। इस आयोजन में अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और रूसी कलाकारों की प्रतिभागिता एक साथ दिखाई देगी।














