भोपाल, 14 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम में बदलाव के संकेत हैं। उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 20 जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग प्रभावित हो सकते हैं, जबकि 17 अक्टूबर को मौसम संबंधी गतिविधियां रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग तक पहुंचने का अनुमान है। इस दिन ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में मौसम बदल सकता है।
हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम के कारण अक्टूबर में भी कुछ इलाकों में वर्षा की स्थिति बन रही है। दिन के समय धूप और गर्मी बनी हुई है, जबकि रात के तापमान में गिरावट से हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। पिछले दस वर्षों के मौसमी रुझानों के अनुसार भी अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंडक का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिलता रहा है।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष जून से सितंबर तक के मानसूनी सीजन में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी लगभग 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी करीब 37.3 इंच से लगभग 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 4 प्रतिशत कम वर्षा हुई। क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से के इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम वर्षा हुई। मानसूनी आंकड़ों के मुताबिक, 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही, जबकि 30 जिलों में वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई। भोपाल, ग्वालियर, गुना, छतरपुर, सतना और रीवा सहित 25 जिलों में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हुआ, जबकि इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, देवास और धार सहित 30 जिलों में कमी बनी रही। जून में सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। बाद के महीनों में अच्छी वर्षा होने के बावजूद शुरुआती कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में करीब 100 दिन सक्रिय रहा। आगामी दिनों में स्थानीय मौसम की स्थिति पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम की सक्रियता पर निर्भर करेगी।














