दोनों नेताओं ने गुरुवार को प्रेस क्लब में संयुक्त पत्रकार वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। नेहा बोरा के संबोधन के बाद वहां हंगामा भी हुआ। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज और वामपंथी छात्र संगठनों के नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर सवाल
नेहा बोरा ने दावा किया कि 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी विशेष संगठन, बैनर या झंडे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आम और गरीब परिवारों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने कर्नाटक के फ्रीडम पार्क, दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के आजाद मैदान में जारी विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।
बोरा ने सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई और लगातार हिरासत से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता।
पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने दिल्ली में भारी पुलिस तैनाती और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 से 15 दिनों में छात्रों, युवा संगठनों, विपक्षी नेताओं और कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ सड़कों पर दुर्व्यवहार किया गया।
दीपके ने 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद रेलवे और दिल्ली मेट्रो बंद किए जाने तथा जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बल बुलाए जाने का दावा भी किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और उनके महत्व को लेकर सवाल उठाए।
प्रशांत भूषण और प्रकाश राज ने भी रखी बात
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि विपक्ष की मांग चुनाव प्रक्रिया में सुधार की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगा रही है। उनके अनुसार, यदि कथित कठोर कार्रवाई जारी रहती है, तो राजनीतिक बदलाव की मांग और तेज हो सकती है।
अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया कि देशभर के 200 से अधिक संगठन, जिनमें किसान, श्रमिक संघ और नागरिक समाज के समूह शामिल हैं, युवाओं के साथ इस आंदोलन में जुड़े हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और कथित अवैध हिरासत की जांच के लिए गठित स्वतंत्र समिति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक लोग जवाहर भवन में समिति के सामने शिकायतें और सबूत प्रस्तुत कर रहे हैं।
प्रकाश राज ने ज्ञानेश कुमार पर सबूत मिटाने का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने छात्रों, महिलाओं और मीडिया पर कथित लाठीचार्ज की भी निंदा की।
उल्लेखनीय है कि विपक्षी दल, सीजेपी और छात्र संगठनों सहित कई समूह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं।














