सेवा संकल्प अभियान से 3,600 से अधिक लोग लाभान्वित
शाह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इससे 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए, जिनमें बस्तर के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे।
उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा ने बस्तर के गरीब आदिवासी परिवारों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में लोगों को दिव्यांगता का सामना करना पड़ा, जिससे उनके सामान्य जीवन और आजीविका पर असर पड़ा।
कृत्रिम अंगों से लौटेगा आत्मविश्वास
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद हिंसा से प्रभावित लोगों के घाव भरना और उन्हें दोबारा जीवन संवारने में मदद करना जरूरी है। सरकार ऐसे जरूरतमंद लोगों की पहचान कर उन्हें कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। इससे वे रोजमर्रा के काम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
उन्होंने एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि सहायता मिलने के बाद वह व्यक्ति तीन साल में पहली बार अपने हाथ से गिलास उठाकर पानी पी सका। शाह ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम बनाना उसे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाने का प्रयास है।
पुनर्वास पर भी जोर
शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था। अब नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और जीवन को बेहतर बनाने के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उपकरण देने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग करना भी है।














