कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उस प्रशिक्षण शिविर का उल्लेख किया, जो 10 से 12 जुलाई तक कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित किया गया था। रमेश के अनुसार, शिविर में कार्यकर्ताओं को जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया था।
उन्होंने 14 अक्टूबर को जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर गठित उच्चस्तरीय समिति की ओर से सुझाव मांगे जाने का भी जिक्र किया। कांग्रेस नेता ने इन घटनाओं को गणनाकारों की नियुक्ति के नियमों में किए गए बदलाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को जनगणना नियम, 1990 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसके तहत गणनाकार नियुक्त करने के लिए पात्र व्यक्तियों की श्रेणियों का दायरा बढ़ाया गया है। अब सरकारी शिक्षण संस्थानों के अलावा सहायता प्राप्त और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी इस काम में लगाया जा सकेगा।
संशोधित नियमों के तहत सोसायटियों और ट्रस्टों के शिक्षकों के साथ केंद्र एवं राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों और संस्थानों के लिपिकों तथा अन्य अधिकारियों को भी पात्र बनाया गया है। राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन जनगणना कार्य के लिए अन्य उपयुक्त व्यक्तियों की नियुक्ति भी कर सकते हैं।
जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 26 मई 2026 को गठित उच्चस्तरीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इस समिति को देश में जनसंख्या संबंधी बदलावों, उनके कारणों और उनसे जुड़े नीतिगत एवं प्रशासनिक उपायों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति ने 14 अक्टूबर को सरकारी विभागों, संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और आम लोगों से जानकारी तथा सुझाव मांगने की प्रक्रिया शुरू की थी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पात्रता नियमों में बदलाव का लाभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े लोगों को पहुंचाया जा सकता है। उनके अनुसार, इससे जनगणना की निष्पक्षता को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी।














