रिजिजू ने सोमवार को लिखे पत्र में खरगे के 16 अक्टूबर के पत्र का जवाब दिया। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन पर विचार से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। रिजिजू ने मानसून सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सदन का सत्रावसान नहीं किए जाने पर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि संविधान में सदन का सत्रावसान करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है। अतीत में भी लंबे अंतराल तक सत्रावसान नहीं होने के उदाहरण रहे हैं। उन्होंने 2008 में लोकसभा की बैठकों के बीच अंतराल के अलावा 1987, 1989, 2006, 2013 और 1963 के उदाहरणों का उल्लेख किया।
कई दलों से चर्चा का दावा
रिजिजू ने कहा कि सरकार ने परिसीमन संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग लेने के लिए 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को पत्र लिखे थे। उनके अनुसार, खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस की ओर से चर्चा के लिए तारीख नहीं मिलने के बाद सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया। इस क्रम में द्रमुक, समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया गया।
रिजिजू ने कहा कि सरकार संसदीय लोकतंत्र और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा में रचनात्मक भूमिका निभाएगी और भविष्य के विधायी कार्यों में बाधा नहीं बनेगी।














