नई दिल्ली, 21 अक्टूबर।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उनकी कलात्मक क्षमताओं व दृष्टिकोण को निखारने पर विशेष बल दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कला किसी भी राष्ट्र की संस्कृति का प्रतिबिंब होती है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि बदलते दौर के अनुसार ढलने और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कलाकारों को अतिरिक्त मार्गदर्शन व प्रशिक्षण प्रदान करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कलाकारों की आर्थिक प्रगति में सहयोग करना और उन्हें आधुनिक आवश्यकताओं के अनुकूल तैयार करना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदर्शनी में देश भर के कलाकारों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया है, जिसमें महानगरों, छोटे शहरों तथा पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों की विविध प्रतिभाओं ने अपने विशिष्ट दृष्टिकोण से भारतीय कला को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि आज के कलाकारों को केवल रचनात्मक अवसरों की ही नहीं, बल्कि वित्तीय सहायता, बड़े बाजारों तक पहुंच और कला संग्रहकर्ताओं से जुड़ने के मंचों की भी सख्त जरूरत है। राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी संबंधित हितधारकों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया ताकि कला केवल दीर्घाओं तक सीमित न रहकर स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचे।














