जांच दल की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती करेंगी। इसमें आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, विशेष कार्य बल के महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि, गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी और कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
एसआईटी भगदड़ के कारणों और घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी। इसमें अत्यधिक भीड़, खराब मौसम, प्रवेश और निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था, अफवाहों, बिजली की विफलता, संरचनात्मक खामियों और भीड़ नियंत्रण में संभावित चूक जैसे पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। यह भी जांचा जाएगा कि पंडाल में मौजूद लोगों की संख्या निर्धारित सुरक्षित क्षमता से अधिक तो नहीं थी और आयोजन की अनुमति देते समय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों तथा निकासी योजनाओं का पालन किया गया था या नहीं।
जांच में आयोजकों, पुलिस, कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन सेवा और सीईएससी की संभावित लापरवाही, कर्तव्य में चूक तथा समन्वय की कमी की भी समीक्षा होगी। दल उत्तरी कोलकाता की संकरी गलियों में भविष्य में भीड़ प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक उपायों, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन निकासी व्यवस्था से जुड़े सुझाव भी देगा।
इसके अलावा पीड़ितों और उनके परिवारों को मिली सहायता, अनुग्रह राशि तथा पुनर्वास की पर्याप्तता का आकलन किया जाएगा। राज्य सरकार ने आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर निष्कर्षों और सिफारिशों सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।














