नई दिल्ली, 21 अक्टूबर।
इजराइल के मिड-वेस्ट इंडिया के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के भारत को ‘परम वैभव’ के शिखर तक ले जाने के लक्ष्य की सराहना की है। उन्होंने नागपुर में संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर आयोजित विजयादशमी उत्सव में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए भारत के विकास और सामाजिक एकता में संघ के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
संघ के शताब्दी वर्ष समारोह में शामिल हुए रेवाच
20 अक्टूबर को आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल होने को रेवाच ने अपने लिए विशेष अवसर बताया। उन्होंने नागपुर के रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर का भी दौरा किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने संघ की शाखा पद्धति और अनुशासन को भी करीब से देखा।
‘परम वैभव’ के लक्ष्य का उल्लेख
रेवाच ने संघ की पारंपरिक प्रार्थना की पंक्ति ‘परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम् समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्’ का उल्लेख किया। उन्होंने इसका भावार्थ राष्ट्र को समृद्धि, सम्मान और वैभव के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने के संकल्प से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति और सामाजिक एकता में संघ का योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उन्हें विश्वास है कि देश अपने परम वैभव के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।
उन्होंने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के उस संदेश का भी समर्थन किया, जिसमें भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने और वैश्विक कल्याण के लिए आगे बढ़ने पर जोर दिया गया था।
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की सराहना
इजराइली राजनयिक ने कैप्टन स्मित मच्छर के साहस और त्याग का भी उल्लेख किया। उन्होंने उन्हें भारत और इजराइल दोनों के लिए प्रेरणादायक नायक बताया। रेवाच के अनुसार, संकट के समय दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह न करना केवल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से भी जुड़ा होता है।
युवाओं और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
रेवाच ने भारत और इजराइल के बीच संबंधों को रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव पर आधारित बताया। उन्होंने युवाओं को शिक्षा, समाज सेवा, इतिहास और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के सामने मौजूद सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए समाज को विभाजित करने वाली ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही।














