नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।
वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते कद और उसकी जनकल्याणकारी नीतियों को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि नई तकनीकों व नवाचारों पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। इनका सीधा फायदा पूरी मानव जाति को मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए।
वे वरिष्ठ लेखक अनिल के. एंटनी द्वारा लिखित पुस्तक ‘एडवांटेज इंडिया : रीशेपिंग द Future फॉर एन इक्विटेबल वर्ल्ड’ के आधिकारिक विमोचन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस पुस्तक का प्रकाशन रूपा पब्लिकेशंस द्वारा किया गया है। अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने लेखक और प्रकाशक को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक देश के अभूतपूर्व बदलावों और वैश्विक परिदृश्य में भारत की नई संभावनाओं को बखूबी उजागर करती है।
विकसित भारत 2047: एक संकल्प और सामूहिक जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक सपना या आकांक्षा मात्र नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक का परम कर्तव्य और जिम्मेदारी है। राष्ट्र निर्माण का यह महान कार्य केवल सरकारों के भरोसे पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अत्यंत आवश्यक है।
गरीबी उन्मूलन और ढांचागत सुधारों में ऐतिहासिक सफलता देश की घरेलू उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देश के 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को भीषण गरीबी के दुचक्र से बाहर निकाला गया है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में किए गए निरंतर प्रयासों से आम जनमानस के जीवन स्तर में सम्मानजनक सुधार आया है।
महिला सशक्तीकरण और आधुनिक अवसंरचना का विस्तार उपराष्ट्रपति ने समावेशी विकास को भारत की प्रगति का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज देश में तीन करोड़ से अधिक ‘लखपति दीदियों’ का सामने आना महिला चालित विकास का सबसे जीवंत प्रमाण है। इसके अलावा नए आईआईटी, एम्स और मेडिकल कॉलेजों के नेटवर्क ने शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा को मजबूत किया है। वहीं वंदे भारत ट्रेनों, विश्वस्तरीय हवाई अड्डों और नए राजमार्गों के निर्माण से देश की कनेक्टिविटी में व्यापक बदलाव आया है।
तकनीक और स्वदेशी निर्माण में भारत का परचम अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि जब देश में कंप्यूटर का आगमन हुआ था, तब अनेक तरह की शंकाएं जताई गई थीं, लेकिन भारत ने खुद को वैश्विक आईटी सेक्टर की महाशक्ति के रूप में स्थापित करके दिखाया। ठीक उसी प्रकार आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां भारत के लिए अपार अवसर लेकर आई हैं।
उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जिक्र करते हुए रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की सराहना की। हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए बहुउद्देशीय पोत ‘आईएनएस समर्थक’ को उन्होंने देश की मजबूत होती घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
वैश्विक मंचों पर भारत की सशक्त आवाज और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कूटनीति में अब एक सकारात्मक और साहसिक बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रभाव और आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। भारत की जी-20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी संपूर्ण विश्व एक परिवार है, भारत का शाश्वत दर्शन है।
भारत द्वारा जी-20 में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाना और 'ग्लोबल साउथ' की बुलंद आवाज बनना देश की वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कोरोना महामारी के दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों का रिकॉर्ड टीकाकरण किया, बल्कि 100 से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीके भेजकर वैश्विक एकजुटता की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक युवाओं को सार्वजनिक नीति, अर्थशास्त्र, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे विषयों को गहराई से समझने के लिए प्रेरित करेगी। इस गरिमामयी समारोह में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्या डॉ. शमिका रवि, रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध सम्पादक कपिश मेहरा सहित कई प्रमुख राजनयिक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।














