नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।
भारत और चीन के रिश्तों में जारी तनाव के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सीमा पर चीनी रवैये और देश की बीजिंग पर बढ़ती व्यापारिक निर्भरता को लेकर गहरी चिंता प्रकट की है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि पड़ोसी देश के साथ भारत के रिश्ते बिना विश्वास की अंतरनिर्भरता पर टिके हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील विषय है।
थरूर ने आईटीबीपी प्रमुख के उस हालिया बयान की पृष्ठभूमि में यह बात कही, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में सेना द्वारा चीनी आक्रामकता से निपटने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि चीन ने भारतीय सीमाओं पर बार-बार अतिक्रमण का प्रयास किया है। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुए सैन्य तनाव के दौरान भी चीन ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था, जिसने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
शशि थरूर के अनुसार, संघर्ष के दौरान चीन ने केवल पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति ही नहीं की, बल्कि भारतीय क्षेत्र के ऊपर तैनात अपने उपग्रहों के माध्यम से वास्तविक समय की जानकारी भी साझा की। पड़ोसी देश द्वारा उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर शत्रुतापूर्ण आचरण को दर्शाता है।
व्यापारिक निर्भरता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत की चीन पर निर्भरता बहुत अधिक है, जबकि वह इसका दुरुपयोग करने से पीछे नहीं हटता। लद्दाख की गलवान घाटी जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीन ने सीमा पर शांति बनाए रखने से जुड़े पुराने समझौतों को एकतरफा तरीके से तोड़ दिया है।
चीन द्वारा व्यापार को हथियार बनाने का जिक्र करते हुए थरूर ने कुछ पुराने उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि चीन ने अतीत में भारत को दुर्लभ खनिजों का निर्यात रोक दिया था। इसके अतिरिक्त, राजमार्गों और सुरंगों के निर्माण में काम आने वाली टनल-बोरिंग मशीनों की आपूर्ति भी अचानक बंद कर दी गई थी, जिससे कई विकास परियोजनाएं बाधित हुई थीं।
अंत में थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत को एक ऐसी अनुमानित और स्थिर विदेश नीति तथा व्यापार प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें आर्थिक संबंधों का राजनीतिक या सामरिक लाभ उठाने के लिए दुरुपयोग न किया जा सके।














