नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।
दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार की शर्त वाले नोटिस को चुनौती दी थी। यह नोटिस 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद जारी किया गया था।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने आदेश सुनाते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि जांच से संबंधित कोई आदेश पारित करने से पहले नेहा बोरा को सभी संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाए और मामले पर उचित ध्यान दिया जाए।
नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर को जारी नोटिस को चुनौती दी थी। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 126, 130 और 135(3) के तहत जारी किया गया था। इन प्रावधानों के अंतर्गत शांति भंग होने की आशंका से जुड़े मामलों में मजिस्ट्रेट जांच कर सकते हैं और निर्धारित परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए मुचलका भरने को कह सकते हैं।
प्रदर्शन और हिरासत को लेकर क्या है विवाद?
नेहा बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। उनका कहना था कि प्रदर्शन में हिंसा का आह्वान नहीं किया गया और नोटिस जारी करने से पहले आवश्यक प्रारंभिक जांच नहीं हुई।
याचिका में दावा किया गया कि बोरा को शाम करीब 5:30 बजे हिरासत में लिया गया, फिर एक अज्ञात स्थान और बाद में आरके पुरम थाने ले जाया गया। याचिका के अनुसार, उन्हें 17 अक्टूबर सुबह 6 बजे रिहा किया गया। नोटिस में नारेबाजी, प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद विरोध प्रदर्शन और लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
दूसरी ओर, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शर्मा ने दलील दी कि संबंधित कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई के लिए प्राप्त सूचना के आधार पर मजिस्ट्रेट की संतुष्टि महत्वपूर्ण है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।














