नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।
भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर आपसी समझ बेहतर बनाने के लिए बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उपयुक्त क्षेत्रों में चर्चा करने पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी है।
सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आईटीबीपी के महानिदेशक की हालिया टिप्पणियों पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब प्रभावित होती है, जब चीनी बल स्थापित गश्त के तरीकों से अलग गतिविधियां करते हैं।
जायसवाल ने जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है। मौजूदा व्यवस्थाओं के जरिए बातचीत जारी रखने का उद्देश्य सीमा पर गलत आकलन और किसी भी तरह की गलतफहमी की आशंका को कम करना है।
ईरान तक जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाने में मदद जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरानी विमानों को भारतीय हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं मिलने संबंधी दावों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत ईरान तक जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में सहायता जारी रखे हुए है।
क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क बनाए रखने में नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। इसके बावजूद भारत ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं को पहुंचाने की व्यवस्था आसान बनाई जा सके। मंत्रालय ने इसे मानवीय आधार पर किया जा रहा प्रयास बताया।














