नई दिल्ली, 24 अक्टूबर।
भारत यूरोप को हथियारों का निर्यात करने वाले देशों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म यूरोप’ पहल के तहत रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग और भारत में घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार से निर्यात को गति मिली है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात अब तक के सर्वोच्च स्तर 38,424 करोड़ रुपये यानी लगभग 3.6 अरब यूरो तक पहुंच गया है। यूरोपीय बाजार में मानक गोला-बारूद, तोपों के गोले और छोटे-बड़े कैलिबर के अन्य आयुधों की मांग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को फायदा हुआ है। पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र का भी तेजी से विस्तार हुआ है। इस क्षेत्र में 16 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, लगभग 840 बड़े और मध्यम निजी उद्यम तथा स्टार्टअप सहित करीब 17 हजार छोटे उद्यम शामिल हैं। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें तोपें, गोला-बारूद, छोटे हथियार, हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य सामरिक उपकरण शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र के सालाना 20 से 25 अरब डॉलर के पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत देश के भीतर खर्च करना है। इसमें भारतीय कंपनियों द्वारा डिजाइन, विकसित और निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। भारतीय रक्षा निर्माताओं के उत्पादों में दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों के खरीदार भी रुचि दिखा रहे हैं। इनमें छोटे हथियार, रक्षा उपकरणों के पुर्जे और तोप प्रणालियां प्रमुख हैं। भारत यूरोपीय रक्षा खरीद में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए यूरोपीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत उन्हें देश में विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रहा है। भारतीय और यूरोपीय रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं के बीच बेहतर तालमेल से वैश्विक मांग पूरी करने के साथ दोनों पक्षों के औद्योगिक सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।














