नई दिल्ली, 24 अक्टूबर।
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमना-सामना जारी है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने इसकी पुष्टि की है। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन के साथ संबंधों पर जवाब मांगा है।
कपूर ने राजस्थान के अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में कई जगहों पर सैनिकों के बीच टकराव की स्थिति बनी है। उन्होंने शौर्य कमांडो दलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सराहनीय काम किया है।
भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच छह सितंबर को वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर बातचीत हुई थी। इसका उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े विवादों का समाधान निकालना था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए भारतीय सैनिकों की तैनाती जारी है।
खरगे ने सवाल उठाया कि बातचीत के कई दौर के बावजूद सीमा पर तनाव क्यों बना हुआ है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारतीय सैनिकों की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है और सरकार देश को पूरी स्थिति से अवगत क्यों नहीं करा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के संदर्भ में चीनी आयात 102 प्रतिशत बढ़ा और व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर 112.16 अरब डॉलर पहुंच गया। उन्होंने चीन से जुड़े निवेश प्रतिबंधों में ढील देने की संभावनाओं पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठकों तथा दोनों देशों के अधिकारियों की वार्ताओं के परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जवाबदेही जरूरी है।
इस बीच, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस अपनी युद्ध क्षमता के आधुनिकीकरण पर काम कर रही है। कपूर के मुताबिक, बल उच्च पर्वतीय अभियानों के लिए विशेष कमांडो इकाई विकसित कर रहा है। प्रत्येक बटालियन में शौर्य कमांडो दल तैयार किए जा रहे हैं और एक पूर्ण कमांडो बटालियन बनाने की योजना है।
बल पुराने हथियारों को बदलने, सीमा चौकियों पर भूमिगत आश्रय बनाने और ड्रोन तथा ड्रोन रोधी प्रणालियों को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। कपूर ने बताया कि 400 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण राशि का 70 प्रतिशत ड्रोन पर खर्च किया गया है। एक अन्य 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की योजना में ड्रोन के लिए 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।














