नई दिल्ली, 26 अक्टूबर।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और अन्य प्रमुख नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और रामायण में बताए गए आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण कर्तव्य, सदाचार, निस्वार्थ सेवा, परोपकार, मित्रता, त्याग, धर्म और भक्ति जैसे मूल्यों की सीख देती है। उन्होंने आशा जताई कि देशवासी इन आदर्शों को अपनाकर अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में निरंतर प्रगति करेंगे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रामायण को भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत परंपराओं की अनमोल धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि सत्य, कर्तव्य, त्याग, करुणा और धर्म के संदेश आज भी मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। ये शिक्षाएं संवेदनशील, सौहार्दपूर्ण और सशक्त समाज के निर्माण की प्रेरणा देती हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से सत्य, धर्म, सम्मान, कर्तव्य और त्याग के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया। उनका जीवन बताता है कि आत्मचिंतन, भक्ति और ज्ञान से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए कहा कि उनकी अमर रचना रामायण भगवान श्रीराम के आदर्शों, सत्य, धर्म और लोककल्याण का संदेश देती है। उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की अमूल्य धरोहर हैं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने महर्षि वाल्मीकि को तप, ज्ञान और करुणा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रामायण के जरिए महर्षि ने भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को लोगों तक पहुंचाया तथा मानवता को कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि सत्य, करुणा और नैतिक आचरण से जुड़ी महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं सदैव प्रेरणा देती रहेंगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याणमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र से पूरी मानवता को परिचित कराया। उनके विचार संयम, सत्य, शुद्ध आचरण और कर्तव्य के प्रति निष्ठा बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।














