नई दिल्ली, 19 अप्रैल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन पारित न हो पाने पर गहरा खेद व्यक्त किया और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए देश की माताओं और बहनों से क्षमा भी मांगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थिति लाखों महिलाओं की आकांक्षाओं को झटका देने वाली है। उन्होंने भावनात्मक पहलू पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं सब कुछ भूल सकती हैं, लेकिन अपने सम्मान से जुड़ी बात को कभी नहीं भूलतीं। उन्होंने इस विधेयक के पारित न हो पाने को देशभर की महिलाओं के आत्मसम्मान पर आघात बताया।
उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन को देश के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार यह पहल महिलाओं को विकास यात्रा में बराबरी का सहभागी बनाने के लिए एक ईमानदार प्रयास थी और इसे 21वीं सदी में महिला सशक्तिकरण का एक महायज्ञ बताया।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन दलों ने इस विधेयक का विरोध किया, वे महिलाओं की शक्ति को हल्के में ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वंशवादी राजनीति करने वाले दल परिवार से बाहर की महिला नेतृत्व के उभरने से भयभीत हैं, जो इस विरोध का एक बड़ा कारण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक का विरोध करना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकार छीनते हुए कुछ लोग मेजें थपथपा रहे थे, जो उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को समझ चुकी हैं और वे इसके लिए जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगेंगी। उनके अनुसार महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करने की यह राजनीतिक प्रवृत्ति अब देश के सामने उजागर हो चुकी है।
सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर उठे सवालों पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा और किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि अनुपातिक रूप से बढ़ेंगी।
प्रधानमंत्री ने पूर्व में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल के एकीकरण, डिजिटल भुगतान, वस्तु एवं सेवा कर तथा तीन तलाक कानून जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णयों को भी शुरुआत में विरोध का सामना करना पड़ा था। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून और उग्रवाद के खिलाफ प्रयासों पर भी हुए विवादों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के विरोध ने अतीत में देश की प्रगति को धीमा किया है और कई पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार लगातार प्रयास करती रहेगी और इसके रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि देश की नारी शक्ति का आशीर्वाद सरकार के साथ है और महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी के सपनों और राष्ट्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस संकल्प को हर हाल में पूरा करना आवश्यक है।










