नई दिल्ली, 06 अप्रैल।
जनजातीय मामलों के मंत्रालय की एक प्रमुख पहल, भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026, जिसका आयोजन ट्राइफेड के सहयोग से किया गया था, का आज नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह 19 दिनों तक चले जनजातीय संस्कृति, शिल्प कौशल और उद्यम के उत्सव का समापन था।
समापन समारोह में दस श्रेणियों - मिट्टी के बर्तन, बेंत और बांस, आभूषण, व्यंजन, उपहार और मिश्रित वस्तुएं, धातु, प्राकृतिक वस्तुएं, चित्रकला, वस्त्र और वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कारीगरों और विक्रेताओं को सम्मानित किया गया। पुरस्कार ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री एम. राजामुरुगन, आईपीएस और जनजातीय मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे द्वारा गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों की उपस्थिति में प्रदान किए गए।
यह उत्सव देश भर के जनजातीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों और उद्यमियों के लिए एक व्यापक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे उन्हें सीधे बाजार तक पहुंच प्राप्त करने और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
महोत्सव की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार थीं:
- 200 से अधिक स्टॉल जिनमें आदिवासी हस्तशिल्प, हथकरघा और प्राकृतिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए
- 300 से अधिक आदिवासी कारीगरों और शिल्पकारों की भागीदारी
- 75 से अधिक वन धन विकास केंद्रों का प्रतिनिधित्व
- 17 लाइव शिल्प प्रदर्शन
- 30 से अधिक आदिवासी खाद्य स्टॉल जिनमें 120 से अधिक आदिवासी रसोइयों ने भाग लिया
आगंतुकों ने आदिवासी कला, वस्त्र, आभूषण, वन-आधारित उत्पाद और प्रामाणिक व्यंजनों की एक जीवंत प्रदर्शनी का अनुभव किया। प्रमुख आकर्षणों में समकालीन आदिवासी डिज़ाइन को बढ़ावा देने वाला आरआईएसए पवेलियन, बाज़ार संपर्क स्थापित करने वाला BTF बाज़ार और एक विशाल आदिवासी फ़ूड कोर्ट शामिल थे।
त्योहार का एक प्रमुख आकर्षण 18 मार्च, 2026 को आरआईएसए ब्रांड का शुभारंभ था, जो समकालीन और वैश्विक बाज़ारों में आदिवासी शिल्प कौशल को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुअल ओराम और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा शुरू की गई यह पहल, डिज़ाइन नवाचार, स्थिरता और बेहतर बाज़ार पहुँच के माध्यम से आदिवासी उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
त्योहार में भारत ट्राइब्स बिज़नेस कॉन्क्लेव, सीएसआर कॉन्क्लेव और वन धन कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया गया, जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, कॉरपोरेट जगत के नेताओं और सामुदायिक हितधारकों को बाज़ार पहुँच, ब्रांडिंग, नवाचार और स्थायी आजीविका जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया।
इस आयोजन को जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसमें 15 लाख से अधिक आगंतुक आए और करोड़ों रुपये की बिक्री हुई, जो आदिवासी उत्पादों के प्रति बढ़ती सराहना और मांग को दर्शाती है।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री अनंत प्रकाश पांडे ने कहा, “भारत जनजाति महोत्सव आदिवासी उत्पादों को मुख्यधारा के बाजारों से जोड़ने और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।”
श्री एम. राजामुरुगन ने कहा, “उत्सव की सफलता आदिवासी उद्यम की बढ़ती ताकत को दर्शाती है, जो कारीगरों को पहचान, बाजार तक पहुंच और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करती है।”
भारत जनजाति महोत्सव 2026 का सफल समापन आदिवासी सशक्तिकरण, ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।




.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)



