कोलकाता, 18 मार्च।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट इस बार राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बन गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पारंपरिक गढ़ में इस बार भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस सीट का परिणाम सिर्फ विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की व्यापक राजनीतिक दिशा का संकेत भी देगा।
भवानीपुर कोलकाता के मध्य स्थित एक शहरी विधानसभा क्षेत्र है और यह कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट का हिस्सा है। आसपास महान शक्तिपीठ कालीघाट स्थित है, जिसे देखकर यह क्षेत्र पहले भवानीपुर यानी मां भवानी का गढ़ कहा जाता था। धीरे-धीरे यह कोलकाता का परिचित और प्रतिष्ठित स्थान बन गया। इस क्षेत्र में कोलकाता नगर निगम के आठ वार्ड शामिल हैं।
इतिहास में भवानीपुर शिक्षित वर्ग, वकीलों और पेशेवरों का प्रमुख केंद्र रहा। बंगाल के सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में भी इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि यह क्षेत्र लंबे समय तक बंगाल के बौद्धिक और सांस्कृतिक अभिजात वर्ग का निवास स्थान रहा।
भवानीपुर की पहचान केवल राजनीतिक सीट के रूप में नहीं बल्कि सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी रही है। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, देशबंधु चित्तरंजन दास, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे और फिल्मकार सत्यजीत रे जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व जुड़े रहे हैं।
संगीत और सिनेमा जगत के बड़े नाम भी इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। इस वजह से भवानीपुर की प्रतिष्ठा ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित आवासीय क्षेत्र के रूप में बनी हुई है। आज का भवानीपुर विरासत और आधुनिकता का मिश्रण प्रस्तुत करता है।
यहां औपनिवेशिक काल की पुरानी इमारतें और हवेलियां हैं, वहीं आधुनिक अपार्टमेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी तेजी से विकसित हुए हैं। क्षेत्र कोलकाता के सबसे महंगे आवासीय इलाकों में शामिल है, जहां पारंपरिक व्यापार, आधुनिक खुदरा बाजार, शैक्षणिक संस्थान और कार्यालय मजबूत नेटवर्क के रूप में मौजूद हैं।
भवानीपुर की एक विशेषता इसकी उत्कृष्ट कनेक्टिविटी है। मेट्रो नेटवर्क के तीन प्रमुख स्टेशन—नेताजी भवन, रवींद्र सदन और जतिन दास पार्क—इस क्षेत्र को शहर के अन्य हिस्सों से जोड़ते हैं। प्रमुख सड़क मार्ग भी यातायात को सुगम बनाते हैं।
क्षेत्र में कालीघाट मंदिर, नेताजी भवन, विक्टोरिया मेमोरियल और एसएसकेएम अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थल भी स्थित हैं। भवानीपुर का चुनावी इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। शुरुआती दशकों में कांग्रेस का प्रभाव रहा, बाद में वाम दलों का भी।
2011 में परिसीमन के बाद सीट के पुनर्गठन के साथ तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव बढ़ा। ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद की औपचारिकताएं पूरी की थीं। 2021 के उपचुनाव में भी उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की थी।
भवानीपुर की मतदाता संरचना पूरी तरह शहरी है। मुस्लिम मतदाता लगभग 21.80 प्रतिशत हैं और अनुसूचित जाति मतदाता 2.23 प्रतिशत। मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग और व्यवसायी समुदाय का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दल इसी सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाते हैं।
मतदान प्रतिशत आमतौर पर स्थिर रहा है, हालांकि समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखा गया। पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में थोड़ी कमी आई है, संभवतः ऊंची आवासीय लागत के कारण कुछ परिवार अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित हुए।
2026 के चुनाव में भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के गढ़ में उतारकर सीधा संदेश दिया है। तृणमूल की ओर से ममता बनर्जी इस सीट पर कैंडिडेट हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि यह मुकाबला पूरे राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला बन सकता है।
भवानीपुर अब सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा, भाजपा की चुनौती और शहरी मतदाताओं का जटिल सामाजिक समीकरण इसे 2026 चुनाव का सबसे चर्चित राजनीतिक रणक्षेत्र बना रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर अपने गढ़ को सुरक्षित रख पाएंगी या शुभेंदु अधिकारी यहां बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर पाएंगे। चुनाव परिणाम इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का अंतिम फैसला करेंगे।












