मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायकों पर कानूनी और राजनीतिक संकट पार्टी की स्थिति को कमजोर कर रहा है।
04 अप्रैल।
मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों के दौर से गुजर रही है। आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के कई विधायक कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों में घिरते नजर आ रहे हैं, जिससे पार्टी की रणनीति और सीटों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विधायकों पर कानूनी संकट, वोटिंग पर असर
कांग्रेस के कुछ विधायकों पर चल रहे आपराधिक और न्यायालयीन मामलों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। दतिया से विधायक राजेंद्र भारती को न्यायालय द्वारा 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता पर संकट खड़ा हो गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत उनकी सदस्यता समाप्त मानी जा रही है, हालांकि वे उच्च न्यायालय से राहत पाने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी तरह, शिवपुरी जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को भी अदालत से राहत तो मिली है, लेकिन उन्हें राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित रखा गया है। इससे कांग्रेस के वोट बैंक पर सीधा असर पड़ सकता है।
अन्य विधायकों पर भी लटकी तलवार
कांग्रेस के कई अन्य विधायकों पर भी न्यायालय में मामले लंबित हैं, जिनमें प्रमुख रूप से: बालाघाट की अनुभा बंजारे, जबलपुर के लखन घनघोरिया, मुरैना के दिनेश गुर्जर, डबरा के सुरेश राजे शामिल हैं। इसके अलावा, रीवा जिले के सिमरिया से विधायक अभय मिश्रा को भी हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उन पर चुनावी शपथ पत्र में जानकारी छुपाने का आरोप है। भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद भी इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
अंदरूनी हलचल और राजनीतिक आरोप
इन घटनाओं के बीच कांग्रेस के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि यह सब राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। पार्टी सार्वजनिक रूप से अपने विधायकों के साथ खड़ी नजर आ रही है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।
भाजपा की स्थिति मजबूत
वर्तमान समीकरणों को देखें तो भारतीय जनता पार्टी के पास दो राज्यसभा सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। वहीं कांग्रेस के लिए एक सीट सुरक्षित रखना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, खासकर यदि कुछ विधायक मतदान से वंचित रहते हैं या उनकी सदस्यता पर असर पड़ता है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बहुआयामी संकट खड़ा हो गया है। विधायकों पर चल रहे मामलों और संभावित अयोग्यता के कारण पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। आने वाले दिनों में अदालतों के फैसले और राजनीतिक रणनीतियां तय करेंगी कि राज्यसभा की तीन सीटों में से किस पार्टी का पलड़ा भारी होगा।