वाराणसी, 04 अप्रैल 2026।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बीएलडब्ल्यू मैदान पर आयोजित तीन दिवसीय महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” के भव्य मंचन ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सजीव अनुभव कराया। मंच पर सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्णिम युग का चित्रण, हाथी-घोड़ों की टापों और युद्ध कौशल के दृश्य, दर्शकों को इतिहास के जीवंत दर्शन कराते नजर आए। 225 से अधिक कलाकारों ने 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊंट, 1 पालकी और 1 हाथी के माध्यम से शानदार अभिनय प्रस्तुत किया और खूब तालियां बटोरीं।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जीवित है। उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों की सरकारें पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। इस महानाट्य का आयोजन महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से किया गया, जिसकी परिकल्पना स्वयं मुख्यमंत्री ने की।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचना, राजेश कुशवाहा के निर्माण और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाट्य मंचन भारतीय सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला अनुभव रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह आयोजन उज्जैन और काशी को सांस्कृतिक एकता में जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

महानाट्य की शुरुआत महाकाल की भस्म आरती, वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन से हुई। दोनों मुख्यमंत्रियों द्वारा दीप जलाने के साथ ही परिसर तालियों और जयघोष से गूंज उठा। “भारत माता की जय” और “सम्राट विक्रमादित्य अमर रहें” के नारों ने वातावरण को उत्साह और गौरव से भर दिया।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसके अद्वितीय मंचन में निहित थी। तीन विशाल मंचों पर समांतर दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें सम्राट के बाल्यकाल, वीरता, न्यायप्रियता, प्रजा के प्रति करुणा और विद्वानों व कला के प्रति सम्मान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। प्रत्येक मंच पर प्रकाश, ध्वनि और दृश्य परिवर्तन इतने सटीक थे कि दर्शकों की नजरें एक पल के लिए भी मंच से नहीं हटीं।
कलाकारों ने संवाद अदायगी, शारीरिक अभिव्यक्ति और अभिनय के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के चरित्र को जीवंत कर दिया। कई दर्शकों ने कहा कि उन्होंने इतना भव्य और सजीव मंचन पहले कभी नहीं देखा। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह प्रस्तुति “लाइव इतिहास की किताब” जैसा अनुभव साबित हुई। मंच पर हाई-टेक लाइटिंग, डिजिटल साउंड इफेक्ट्स, एलईडी बैकड्रॉप, स्मोक और स्पेशल इफेक्ट्स का भरपूर उपयोग किया गया।












