वाराणसी, 03 अप्रैल 2026।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दृश्य कला संकाय ने अपने पहले स्कोपस-अनुक्रमित शोध प्रकाशन के साथ एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट में प्रकाशित हुआ है और जलवायु परिवर्तन के युग में डिजिटल विज्ञापन की भूमिका को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।
शोध के लेखक प्रो. मनीष अरोरा, डॉ. पीयूष कुमार गुप्ता और प्रो. प्रशांत कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह अध्ययन डिजिटल मीडिया आधारित विज्ञापन रणनीतियों के प्रभाव को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संदर्भ में पुनर्परिभाषित करता है। इस शोध को आईसीएसएसआर-इम्प्रेस राष्ट्रीय नीति अनुसंधान कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित किया गया है।
प्रो. मनीष अरोरा ने कहा कि शोध में अभिसारी मिश्रित पद्धति का उपयोग किया गया, जिसमें मात्रात्मक सर्वेक्षण और विशेषज्ञ साक्षात्कार आधारित गुणात्मक विश्लेषण दोनों शामिल हैं। इसके माध्यम से डिजिटल अभियानों के प्रभाव, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, ब्रांड निष्ठा और जन-विश्वास में वृद्धि का व्यापक विश्लेषण किया गया।
शोध निष्कर्षों में यह पाया गया कि पर्यावरण केंद्रित डिजिटल विज्ञापन अभियानों से उपभोक्ताओं की जागरूकता और सकारात्मक व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार होता है। साथ ही विज्ञापन सामग्री और उपभोक्ता व्यवहार के बीच उच्च सहसंबंध पाया गया। अध्ययन में टिकाऊ विज्ञापन की आठ प्रमुख रणनीतिक आयामों की पहचान भी की गई।
इस शोध प्रकाशन ने बीएचयू के दृश्य कला संकाय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है और डिजिटल मीडिया के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के महत्व को स्थापित किया है।











