भोपाल, 3 अप्रैल, 2026।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष मध्य प्रदेश में सामाजिक चेतना और परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभरा है। संघ का कार्य अब केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के हर क्षेत्र और वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने में सफल हुआ है। प्रदेश को मध्य भारत, मालवा और महाकौशल के तीन प्रांतों में विभाजित कर देखें तो सेवा, संगठन और समाज जागरण के विविध आयाम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
मध्य भारत प्रांत के संघचालक अशोक पाण्डेय ने बताया कि स्वयंसेवक नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं और हर क्षेत्र में सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्र को उच्च वैभव तक ले जाना है और इसके लिए स्वयंसेवक प्रार्थना में इस संकल्प को दोहराते हैं।
संघ का संगठन विस्तार भी उल्लेखनीय है। मध्य भारत में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं, मालवा में 3292 स्थानों पर 5049 शाखाएं और महाकौशल में 2141 स्थानों पर 3078 शाखाएं संचालित हैं। साप्ताहिक मिलन और संघ मंडलियों के माध्यम से संगठन की जड़ें गहरी हुई हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में लगभग 12,000 शाखाएं सक्रिय हैं।
सेवा कार्यों का सबसे प्रभावी आयाम राज्य की सेवा बस्तियों में दिखाई देता है। मध्य भारत में 970, मालवा में 672 और महाकौशल में भी व्यापक सेवा गतिविधियां संचालित हैं। इन कार्यक्रमों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और संस्कार के क्षेत्र शामिल हैं। विशेषकर नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और गौसंवर्धन जैसे उपक्रम समाज को सीधे जोड़ने में सफल रहे हैं।
प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास भी संघ कार्य का आधार हैं। मध्य भारत में 8021 स्वयंसेवक 179 प्रारंभिक वर्गों में और 3485 स्वयंसेवक 61 प्राथमिक वर्गों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। मालवा और महाकौशल में भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्रशिक्षण चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों ने जनभागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि की है। विजयादशमी उत्सव और पथ संचलन में मध्य भारत, मालवा और महाकौशल में लाखों स्वयंसेवक शामिल हुए। “हिंदू सम्मेलन” ने सामाजिक समरसता को मजबूती प्रदान की और इसमें महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही।
गृह संपर्क अभियान ने प्रत्येक घर तक संघ कार्य और संदेश पहुंचाया। मध्य भारत में 27 लाख, मालवा में 32 लाख और महाकौशल में 43 लाख परिवारों तक संवाद किया गया। युवा कार्यक्रमों, बाल गोकुलम, अध्ययन केंद्र और युवा संवाद ने नई पीढ़ी को संघ कार्य से जोड़ने में मदद की।
समाज के प्रबुद्ध वर्ग को जोड़ने के लिए आयोजित प्रमुखजन गोष्ठियां और सामाजिक सद्भाव बैठकों ने भी सकारात्मक प्रभाव डाला। मालवा और मध्य भारत में हजारों प्रमुखजन कार्यक्रमों में शामिल हुए।
तीनों प्रांतों के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि संघ का कार्य बहुआयामी और समाजव्यापी हो गया है। शाखाओं का विस्तार, सेवा कार्यों की व्यापकता, करोड़ों लोगों तक पहुंच और युवाओं की बढ़ती भागीदारी संघ के शताब्दी वर्ष को समाज परिवर्तन के अभियान में बदलती है। पंचपरिवर्तन के लक्ष्य—स्व की जागृति, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—व्यवहार में उतर रहे हैं और आने वाले समय में यह जागृत समाज राष्ट्र निर्माण को और सशक्त बनाएगा।












