धर्मशाला, 27 मई ।
सर्वोच्च तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की उपस्थिति में तिब्बत की निर्वासित सरकार के नवनिर्वाचित सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने बुधवार को दूसरी बार पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। यह शपथ समारोह मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मठ चुगलाखांग मंदिर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, विदेशी प्रतिनिधि और तिब्बती समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
पेंपा सेरिंग लगातार दूसरी बार इस पद के लिए निर्वाचित हुए हैं। शपथ ग्रहण से पहले उन्होंने दलाई लामा का आशीर्वाद प्राप्त किया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना गया।
शपथ के बाद अपने संबोधन में सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने कहा कि चीन द्वारा तिब्बती राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करने के प्रयासों के बावजूद तिब्बती लोगों का अपनी मातृभूमि से गहरा संबंध अटूट है। उन्होंने कहा कि तिब्बती सभ्यता के आरंभ से ही लोग अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर ‘बर्फ की भूमि’ के सच्चे संरक्षक रहे हैं, इसलिए तिब्बत में रहने वाले लोगों को अपनी भाषा, धर्म और संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने भारत, अमेरिका सहित उन सभी देशों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने तिब्बती आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सत्य और न्याय के लिए संघर्ष में यह सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने दलाई लामा के दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करते हुए उनके चार प्रमुख संकल्पों को विश्वभर में फैलाने की अपील की और तिब्बतियों के शीघ्र पुनर्मिलन की आशा व्यक्त की।
उल्लेखनीय है कि 1959 में तिब्बत पर चीन के नियंत्रण के बाद दलाई लामा के नेतृत्व में हजारों तिब्बतियों ने भारत में शरण ली थी। इसके बाद निर्वासित तिब्बती सरकार का गठन हुआ, जिसका नेतृत्व पहले दलाई लामा के पास था, लेकिन 2011 में इसे लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत निर्वाचित नेतृत्व को सौंप दिया गया। इसी प्रक्रिया में पहले डॉ. लोबसांग सांगये और बाद में पेंपा सेरिंग निर्वाचित हुए। इस बार भी विभिन्न देशों में बसे तिब्बतियों ने मतदान कर पेंपा सेरिंग को पुनः चुना।









