नेपाल
27 May, 2026

नेपाल के वीपी कोइराला कैंसर अस्पताल में दवाओं का गंभीर संकट, कीमोथेरेपी प्रभावित, मरीजों की बढ़ी परेशानी

नेपाल के वीपी कोइराला मेमोरियल कैंसर अस्पताल में प्रमुख कैंसर दवाओं की भारी कमी से कीमोथेरेपी प्रभावित हो रही है और मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वैश्विक आपूर्ति संकट को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है।

काठमांडू, 25 मई।

नेपाल के सबसे बड़े वीपी कोइराला मेमोरियल कैंसर अस्पताल में कैंसर उपचार के लिए आवश्यक प्रमुख दवाओं की भारी कमी उत्पन्न हो गई है, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इन दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अस्पताल पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग प्रमुख ने बताया कि विश्वभर में कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण दवाओं की कमी देखी जा रही है, जिसका सीधा प्रभाव अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ रहा है और इससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज में कठिनाई हो रही है।

उन्होंने कहा कि दवाओं की उपलब्धता घटने से कीमोथेरेपी की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है और बाजार में निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं के उपयोग की संभावना बढ़ने से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

बताया गया है कि वर्तमान में कार्बोप्लाटिन और सिसप्लाटिन जैसी प्रमुख दवाओं की अत्यधिक कमी बनी हुई है, जो केवल नेपाल ही नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति संकट का हिस्सा है, तथा मुख्य कच्चे पदार्थ की आपूर्ति में कमी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है, साथ ही निकट भविष्य में ऑक्सालोप्लाटिन की कमी की आशंका भी जताई गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार ये दवाएं कीमोथेरेपी उपचार की आधारभूत संरचना होती हैं और इनके बिना पूरा उपचार प्रोटोकॉल प्रभावित होता है, जिससे इलाज की गुणवत्ता घटने के साथ रोगियों की स्वस्थ होने की संभावना भी कमजोर पड़ रही है।

कई मरीज पड़ोसी देशों या बाहरी स्रोतों से दवाएं लाने को मजबूर हैं, लेकिन इनमें से कई दवाएं पंजीकृत नहीं हैं और कुछ की पैकिंग भी खुली हुई पाई जा रही है, साथ ही इन्हें बिना सही कस्टम प्रक्रिया के लाया जा रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कैंसर की दवाओं को नियंत्रित तापमान में रखना आवश्यक होता है, लेकिन अधिक गर्म वातावरण में रखकर लाई गई दवाओं की प्रभावशीलता घट जाती है, जिससे उपचार का लाभ कम और जोखिम अधिक हो सकता है।

अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज कीमोथेरेपी पर निर्भर हैं और प्रमुख दवाओं के विकल्प सीमित होने के कारण उपचार प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे चिकित्सा गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

कुछ मामलों में निजी दवा दुकानदारों द्वारा दवाओं की उपलब्धता के बदले अन्य दवाएं भी उसी दुकान से खरीदने की शर्त लगाए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

सरकार और औषधि व्यवस्था विभाग से अवैध आपूर्ति और बाजार में अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी की मांग की गई है, जबकि पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दवाओं की आपूर्ति कई महीनों पहले ही बाधित हो चुकी थी और मौजूदा स्टॉक भी समाप्त हो चुका है।

हालांकि अब कुछ दवाएं विदेश से आयात कर आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है, और स्वास्थ्य मंत्रालय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता की मांग भी की गई है, साथ ही बच्चों के लिए उपलब्ध दवाओं को अन्य मरीजों के लिए उपयोग करने की अनुमति का अनुरोध किया गया है, जिससे कुछ राहत मिलने की संभावना जताई गई है।

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