जम्मू, 28 मार्च
जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई-शहरी) के तहत अब तक 31,173 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 7,980 मकानों का निर्माण कार्य अभी जारी है। देरी के पीछे मुख्य कारण लाभार्थियों से संबंधित आर्थिक और व्यक्तिगत समस्याएं बताई गई हैं।
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि पीएमएवाई-शहरी मिशन 1.0 के बीएलसी घटक के तहत कुल 39,153 मकान स्वीकृत किए गए थे। इन मकानों में से अधिकांश बन चुके हैं और अधूरे मकानों को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार जम्मू जिले में सबसे अधिक 5,755 मकान स्वीकृत हुए। इसके बाद बारामूला में 4,165 और अनंतनाग में 3,856 मकान स्वीकृत हैं। श्रीनगर जिले में 3,508 मकानों में से 2,664 पूरे हो चुके हैं और 844 निर्माणाधीन हैं। लाल चौक विधानसभा क्षेत्र में 423 मकान स्वीकृत हुए, जिनमें 263 पूरे हो चुके हैं और 160 निर्माणाधीन हैं।
पीएमएवाई-शहरी 2.0 के तहत 21,271 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 16,830 का सत्यापन हो चुका है। कुल 2,863 आवेदक पात्र पाए गए हैं और अब तक 2,120 घरों को 53 करोड़ रुपये की सहायता के साथ मंजूरी दी गई है।
एएचपी योजना के तहत 1,272 फ्लैट मंजूर किए गए हैं। इनमें जम्मू के भलवाल में 760, रूप नगर में 208 और उधमपुर के चखर सुंदली में 304 फ्लैट निर्माणाधीन हैं। लाभार्थियों का सत्यापन अभी जारी है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि बीएलसी योजना में घरों का निर्माण स्वयं लाभार्थियों द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार 1.50 लाख रुपये और केंद्रशासित प्रदेश 0.1666 लाख रुपये की सहायता किस्तों में देता है, जिनकी निगरानी जमीनी निरीक्षण और जियो-टैगिंग के जरिए की जाती है। लाभार्थियों को 2.93 लाख से 3.39 लाख रुपये तक का स्वयं का योगदान भी करना पड़ता है।
निर्माण में देरी के कारणों में सीमित आर्थिक क्षमता, धन की कमी, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें और व्यक्तिगत समस्याएं शामिल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर बैंक के माध्यम से प्रति लाभार्थी 2 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिसे 10 वर्षों में चुकाया जा सकेगा।











