25 मार्च
हिंदू परंपरा में नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति के जागरण का पवित्र समय माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जब-जब धरती पर अधर्म और राक्षसी शक्तियाँ बढ़ीं, तब-तब आदिशक्ति दुर्गा ने अलग-अलग रूपों में जन्म लेकर संतुलन स्थापित किया। इन नौ रूपों को ही “नवदुर्गा” कहा जाता है, जिनकी पूजा शारदीय और चैत्र नवरात्रि के शुक्ल पक्ष में नौ दिनों तक की जाती है। ज्योतिष दृष्टि से भी यह समय अत्यंत विशेष होता है, क्योंकि इन दिनों में चंद्रमा की शक्ति (शुक्ल पक्ष) बढ़ती है और ग्रहों की ऊर्जा सकारात्मक रूप में प्रभाव डालती है, जिससे देवी शक्ति का प्रभाव और भी प्रबल हो जाता है।
1. शैलपुत्री
पहले दिन पूजी जाने वाली शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इनका जन्म प्रकृति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इनका संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है, जो मन और शांति का कारक है। इनका जन्म यह दर्शाता है कि हर नई शुरुआत में स्थिरता और धैर्य जरूरी है।

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2. ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का पूजन होता है, जो तप और साधना की देवी हैं। कहा जाता है कि इन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया। इनका संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, जो शक्ति और संकल्प का प्रतीक है।
3. चंद्रघंटा
तीसरे दिन चंद्रघंटा का पूजन होता है, जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र है। इनका जन्म राक्षसों के विनाश और शांति की स्थापना के लिए हुआ था। इनका संबंध शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जो सौंदर्य और संतुलन का कारक है।

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4. कूष्मांडा
चौथे दिन कूष्मांडा देवी की पूजा होती है। माना जाता है कि इन्होंने अपनी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। इनका संबंध सूर्य से माना जाता है, जो ऊर्जा और जीवन का स्रोत है।

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5. स्कंदमाता
पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होती है, जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं। इनका जन्म मातृत्व और रक्षा का प्रतीक है। इनका संबंध बुध ग्रह से माना जाता है, जो बुद्धि और संतुलन देता है।

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6. कात्यायनी
छठे दिन कात्यायनी देवी की पूजा होती है, जिनका जन्म महर्षि कात्यायन के घर हुआ था। इनका जन्म राक्षस महिषासुर के वध के लिए हुआ। इनका संबंध बृहस्पति ग्रह से है, जो धर्म और ज्ञान का प्रतीक है।

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7. कालरात्रि
सातवें दिन कालरात्रि का पूजन होता है। यह देवी अंधकार और भय को समाप्त करने वाली हैं। इनका संबंध शनि ग्रह से माना जाता है, जो कर्म और न्याय का कारक है।

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8. महागौरी
आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है, जो शुद्धता और सौम्यता का प्रतीक हैं। इनका संबंध राहु से जोड़ा जाता है, जो भ्रम को दूर करने की शक्ति देता है।

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9. सिद्धिदात्री
नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो सभी सिद्धियों को देने वाली देवी हैं। इनका संबंध केतु ग्रह से माना जाता है, जो आध्यात्मिकता और मोक्ष का प्रतीक है।

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नवदुर्गा की यह कथा केवल देवी-पूजन की परंपरा नहीं, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा, ज्योतिषीय प्रभाव और धर्म की स्थापना का गहरा रहस्य समेटे हुए है। हर देवी का जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ—कहीं संतुलन बनाने के लिए, कहीं अधर्म का नाश करने के लिए। यही कारण है कि नवरात्रि में इन नौ रूपों की पूजा कर व्यक्ति अपने जीवन में शक्ति, शांति और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करता है।












