लखनऊ, 27 मार्च 2026।
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर जनता के बीच अलग-अलग रूपों में दिखाई दिए, जहां उन्होंने जनता को समर्पित राजनेता, निर्विकार संत और सनातन के ध्वजवाहक के रूप में अपनी छवि निखारी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही शक्तिपीठों पर शीश झुकाकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को सुनिश्चित किया।
मुख्यमंत्री योगी ने मार्च माह में राम, कृष्ण और शिव की धरा पर पहुंचकर ‘नर सेवा-नारायण सेवा’ के अपने ध्येय को शीर्ष पर रखा। चैत्र नवरात्रि की प्रथमा तिथि पर श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या पहुंचे और सप्तमी को मां पाटेश्वरी मंदिर, देवीपाटन में दर्शन-पूजन किया। अष्टमी तिथि पर गोरखनाथ मंदिर में हवन-पूजन और नवमी तिथि पर कन्या पूजन व श्रीरामलला के प्राकट्योत्सव में सम्मिलित हुए।
योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अनेक शक्तिपीठों का भ्रमण कर मंदिरों में श्रद्धा निवेदित की। मार्च की शुरुआत में काशी विश्वनाथ धाम और कालभैरव मंदिर (वाराणसी), 7 मार्च को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा और 12 व 19 मार्च को अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन-पूजन किए। इन दौरान मुख्यमंत्री ने संत और अभिभावक दोनों की भूमिका निभाते हुए युवाओं को स्मार्टफोन व नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी और सनातन की ध्वजा कभी न झुकने देने की हुंकार भी लगाई।
जनता के बीच रहते हुए मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं और कल्याणकारी पहलों के तहत प्रत्यक्ष सेवा की। 3 व 5 मार्च को गोरखपुर में जनता दर्शन, 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण हेतु वित्तीय सहायता का वितरण, 17 मार्च को कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं को सहायता राशि, 22 मार्च को नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों के नियुक्ति पत्र और 25 मार्च को बहराइच में भूमि पट्टा वितरण सहित अनेक योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाया।
नवरात्रि से पहले मुख्यमंत्री योगी ने काशी विश्वनाथ, मां विंध्यवासिनी धाम और मां शाकुंभरी मंदिर का भी दौरा किया। इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान के कई आध्यात्मिक स्थलों पर भी उन्होंने दर्शन-पूजन किया।











