नई दिल्ली, 22 मई ।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास में तकनीकी दक्षता को मजबूत करने के उद्देश्य से नॉर्वे के जियोटेक्निकल संस्थान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता ओस्लो में संपन्न हुआ, जिसका लक्ष्य भारत के राजमार्ग ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित और सुदृढ़ करना है।
इस सहयोग के माध्यम से सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता विश्लेषण, ढलानों की निगरानी और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में उन्नत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत परियोजनाओं की योजना, डिजाइन, मूल्यांकन और निगरानी में तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।
समझौते के अंतर्गत नॉर्वे का संस्थान विभिन्न परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिनमें सुरंग परियोजनाओं के लिए स्थल चयन, व्यवहार्यता अध्ययन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना तथा चालू सुरंगों की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन शामिल है। इसके साथ ही ढलानों में संभावित खतरों की पहचान कर शमन उपाय सुझाने और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर भी कार्य किया जाएगा।
इस समझौते में संस्थागत क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया है। दोनों संस्थान प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों में सहयोग करेंगे। इसके साथ ही संयुक्त कार्यशालाएं, सेमिनार, तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम और विशेष तकनीकी प्रकाशनों के माध्यम से राजमार्ग क्षेत्र की क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा।
यह समझौता पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और इसे परियोजना आधारित तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे दोनों पक्ष अन्य संगठनों के साथ स्वतंत्र रूप से सहयोग भी कर सकेंगे।
इस साझेदारी से सुरक्षित, टिकाऊ और विश्व स्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है तथा भारत और नॉर्वे के बीच तकनीकी और अवसंरचनात्मक सहयोग और अधिक मजबूत होगा।




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