नई दिल्ली, 27 जुलाई।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में हुई हिंसा की जांच के संबंध में दावा किया है कि अब तक 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का विश्लेषण किया गया है। पुलिस के अनुसार, इसके आधार पर प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 989 लोगों के खिलाफ पहले से विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज, पुलिस के वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसके बाद फेस रिकग्निशन तकनीक और उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उनके आपराधिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
पुलिस का दावा है कि चिन्हित लोगों में 101 व्यक्तियों के खिलाफ हत्या, 62 के खिलाफ हत्या के प्रयास, 284 के खिलाफ डकैती और लूट, 61 के खिलाफ दुष्कर्म, 6 के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, 25 के खिलाफ महिलाओं से छेड़छाड़, 229 के खिलाफ आर्म्स एक्ट, 135 के खिलाफ झपटमारी, 19 के खिलाफ अपहरण तथा 67 के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि कई लोग आदतन अपराधी हैं। पुलिस के अनुसार, हत्या के मामलों में चिन्हित 101 लोगों में से 42 के खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि इनमें 12 ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन पर 10 या उससे अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
इसी प्रकार हत्या के प्रयास के मामलों में चिन्हित 62 लोगों में से 25 पर दो या अधिक मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है। वहीं डकैती और लूट के मामलों में शामिल 284 लोगों में से 155 के खिलाफ एक से अधिक तथा 31 लोगों पर 10 या उससे अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इसके अलावा दुष्कर्म के मामलों में शामिल 61 लोगों में आठ, महिलाओं से छेड़छाड़ के 25 लोगों में छह तथा एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े 67 लोगों में नौ के खिलाफ भी दो या उससे अधिक मामले दर्ज होने का पुलिस ने दावा किया है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह विश्लेषण प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस पर हमले की जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चिन्हित लोगों की घटनाओं में क्या भूमिका थी और क्या हिंसा के पीछे कोई सुनियोजित साजिश या संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
हालांकि, ये सभी आंकड़े दिल्ली पुलिस के दावों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है।

















