नई दिल्ली, 27 जुलाई।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 10 और 20 रुपये के पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल और बाद में नियमित जारी करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
लोकसभा में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में बताया कि आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलिमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव भेजा गया था। ट्रायल सफल होने के बाद नियमित रूप से पॉलिमर नोट जारी करने के प्रस्ताव को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है।
सरकार के अनुसार, आरबीआई का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पॉलिमर बैंक नोटों की आयु पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक पाई गई है। ऐसे नोट अधिक टिकाऊ होने के साथ नमी और सामान्य टूट-फूट के प्रति भी अपेक्षाकृत बेहतर माने जाते हैं।
वित्त राज्यमंत्री ने यह भी बताया कि पॉलिमर नोटों की शुरुआत प्रारंभिक चरण में होगी, इसलिए इनके डिजिटल भुगतान प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नकद भुगतान और डिजिटल भुगतान, दोनों एक-दूसरे के पूरक माध्यम हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल देश में प्रचलित कागजी नोटों को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी किए जाएंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा वैध रहेगी।

















