पांढुर्णा, 11 सितंबर।
पांढुर्णा में शुक्रवार को करीब 300 साल पुरानी गोटमार मेले की परंपरा के दौरान पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीणों के बीच जमकर पथराव हुआ। शाम छह बजे तक इस घटना में 1185 लोगों के घायल होने की सूचना है। सात गंभीर घायलों को उपचार के लिए नागपुर भेजा गया है।
मेले की शुरुआत सुबह 11 बजे पूजा-अर्चना के साथ हुई। चंडी माता मंदिर और जाम नदी में लगाए गए पलाश के झंडे की पूजा के बाद दोनों गांवों के लोग आमने-सामने आए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई।
पथराव में कई लोगों के सिर फूटे और हड्डियां टूट गईं। सावरगांव के नितिन भादे का पैर टूट गया। संजय धारपुरे के सिर और पैर में गंभीर चोट आई। पांढुर्णा के सचिन हाटेकर का पैर टूट गया। प्रीतम योगेश राउत के सिर और सीने तथा कैलाश नंदू साहू के सिर, कमर और पैर में चोट आई है। सात गंभीर घायलों को नागपुर भेजा गया है।
मेले में पांच वर्षीय योगेश मरावी भी पत्थर लगने से घायल हो गया। वह परिवार के साथ महाराष्ट्र के मोवाड से मेला देखने आया था। घायलों के उपचार के लिए सात अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र में 10 सीसीटीवी कैमरों और तीन ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने गुलेल और धारदार हथियारों पर प्रतिबंध लगाया है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। जाम नदी के बीच पलाश का पेड़ और झंडा लगाया जाता है। दोनों गांवों के लोग इसे हासिल करने के लिए मुकाबला करते हैं और जो पक्ष पहले झंडा प्राप्त करता है, उसे विजेता माना जाता है।















